Health Tips: हर साल 1.9 लाख कैंसर केस! जानिए कौन से संक्रमण बन रहे वजह

भारत में हर साल 1.9 लाख कैंसर मामले संक्रमणों से जुड़े बताए गए हैं, जानिए एचपीवी और हेपेटाइटिस समेत प्रमुख कारण।

हर साल 1.9 लाख कैंसर केस!

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 4, 2026

Health Tips: आज के समय में कैंसर आम बात हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण बदलता खानपान को बताया जाता है, साथ ही तंबाकू, शराब, मोटापा भी इसकी वजह मानी जाती है। एक नई वैश्विक मेडिकल रिसर्च में भारत को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर साल करीब 1.9 लाख नए कैंसर के मामले ऐसे हैं, जिनका संबंध बैक्टीरिया और वायरस से होने वाले संक्रमणों से है।

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भारत में कैंसर के मामलों में संक्रमण की बड़ी भूमिका

विश्व स्वास्थ्य संगठन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर यानी आईएआरसी के शोधकर्ताओं की स्टडी के मुताबिक, भारत में वर्ष 2024 में 15.62 लाख से अधिक नए कैंसर मामले सामने आए। इनमें 12 प्रतिशत से ज्यादा मामलों के पीछे किसी न किसी पुराने संक्रमण को जिम्मेदार माना गया है। वैश्विक स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। दुनिया में करीब 23 लाख कैंसर के मामले ऐसे बताए गए हैं, जिनका संबंध संक्रमणों से है। खास बात यह है कि इनमें से कई संक्रमणों को टीकाकरण, जांच और समय पर उपचार के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।

एचपीवी संक्रमण सबसे बड़ा खतरा

एचपीवी संक्रमण सबसे बड़ा खतरा
एचपीवी संक्रमण सबसे बड़ा खतरा

भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों में ह्यूमन पेपिलोमावायरस यानी एचपीवी की भूमिका सबसे ज्यादा सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले एचपीवी संक्रमण से देश में एक लाख से अधिक कैंसर के मामले जुड़े हुए हैं। एचपीवी विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस संक्रमण से जुड़े कैंसर के खतरे को कम करने के लिए एचपीवी वैक्सीन अहम भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता भी बेहद जरूरी है।

पेट का बैक्टीरिया भी बढ़ा सकता है कैंसर का खतरा

एचपीवी के बाद हेलिकोबैक्टर पायलोरी नामक बैक्टीरिया भी चिंता का बड़ा कारण है। यह बैक्टीरिया पेट में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है और कुछ मामलों में गैस्ट्रिक यानी पेट के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। रिपोर्ट में भारत में करीब 47 हजार कैंसर मामलों को इस बैक्टीरिया से जोड़कर देखा गया है। इसलिए लंबे समय से बनी पेट की समस्या, संक्रमण या असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

हेपेटाइटिस बी-सी और एपस्टीन-बार वायरस का भी खतरा

लिवर को प्रभावित करने वाले हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस भी कैंसर के जोखिम से जुड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस बी से करीब 10 हजार और हेपेटाइटिस सी से लगभग 5,300 लिवर कैंसर के मामले जुड़े पाए गए हैं। वहीं, एपस्टीन-बार वायरस से लगभग 22 हजार कैंसर मामलों का संबंध बताया गया है। ये संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बने रह सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में कोशिकाओं में ऐसे बदलाव पैदा कर सकते हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

टीकाकरण और जांच से कम हो सकता है जोखिम

विशेषज्ञों के मुताबिक, संक्रमण से जुड़े कैंसर के कई मामलों को रोकने की संभावना मौजूद है। इसके लिए समय पर टीकाकरण, नियमित स्क्रीनिंग और संक्रमण का सही इलाज महत्वपूर्ण है। एचपीवी से बचाव के लिए पात्र लोगों में वैक्सीनेशन और नवजात बच्चों को हेपेटाइटिस बी का टीका देना अहम कदम हैं। इसके साथ ही शरीर में लंबे समय से बने किसी संक्रमण या असामान्य स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

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