CAA West Bengal: CAA पर बंगाल में बड़ा ऐलान, 6 महीनों में नागरिकता आवेदनों के समाधान का दावा

पश्चिम बंगाल में CAA को लेकर बड़ा दावा किया गया है कि नागरिकता के लंबित आवेदनों का निपटारा छह महीनों के भीतर किया जा सकता है। इस बयान के बाद CAA को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर प्रक्रिया के क्रियान्वयन और आगे की प्रगति पर है।

CAA West Bengal

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 1, 2026

CAA West Bengal: पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के क्रियान्वयन को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। न्यू टाउन में आयोजित नागरिकता प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में लंबित सभी नागरिकता आवेदनों का निपटारा अगले छह महीनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम में उत्तर 24 परगना जिले के मटुआ समुदाय के लगभग 300 लोगों को नागरिकता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को समयबद्ध तरीके से नागरिकता उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इस दिशा में प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।

CAA का उद्देश्य नागरिकता देना, किसी को वंचित करना नहीं

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है। उन्होंने नागरिकता के योग्य लोगों से आगे आकर आवेदन करने की अपील की और भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में बड़ी संख्या में आवेदनों का निपटारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है ताकि पात्र लोगों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

हजारों प्रमाणपत्र जारी, लाखों आवेदन लंबित

कार्यक्रम के दौरान नागरिकता संबंधी आंकड़े भी साझा किए गए। जानकारी के अनुसार, अब तक राज्य में कुल 23,956 नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 5,966 प्रमाणपत्र हाल के 11 सप्ताह के दौरान वितरित किए गए हैं। वहीं, राज्य में अब तक कुल 2,30,605 नागरिकता आवेदन प्राप्त हुए हैं। नादिया और उत्तर 24 परगना जिले ऐसे क्षेत्र हैं जहां सबसे अधिक आवेदन दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शेष आवेदनों के त्वरित निपटारे के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई कदम उठाए जा रहे हैं।

जिलाधिकारियों को मिल सकती हैं अतिरिक्त प्रशासनिक शक्तियां

उन्होंने बताया कि नागरिकता आवेदनों के शीघ्र निपटारे के लिए जिलाधिकारियों को आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक अधिकार देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सकती है। उनके अनुसार, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में पहले से इसी प्रकार की व्यवस्था लागू है और अब पश्चिम बंगाल में भी इसे लागू करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में केंद्रीय गृह सचिव के साथ विस्तृत चर्चा हुई है, ताकि नागरिकता प्रक्रिया को और अधिक सरल तथा तेज बनाया जा सके।

पिछली सरकार पर लगाए भ्रम फैलाने के आरोप

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पिछली राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उनका आरोप था कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जोड़कर लोगों के बीच भ्रम फैलाया गया। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय में यह आशंका पैदा की गई कि नागरिकता प्रक्रिया से उनकी नौकरी, सरकारी योजनाओं या अन्य अधिकारों पर असर पड़ेगा। उनके अनुसार, इस तरह की आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं थीं और इससे केवल लोगों में अनावश्यक डर का माहौल बना।

लाभार्थियों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा

उन्होंने यह भी कहा कि CAA के तहत नागरिकता प्राप्त करने वाले पात्र लाभार्थियों को आवश्यक प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी आवेदक के खिलाफ दस्तावेजों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई लंबित है या वह किसी अन्य कारण से न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है, तो नियमानुसार सहायता प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही नागरिकता मिलने के बाद लाभार्थियों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने, पात्र होने पर अनुसूचित जाति (SC) प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने तथा अन्य सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नागरिकता आवेदकों को किसी प्रकार की अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े और पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।

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