BWF 15 Points Rule : बैडमिंटन की दुनिया में पिछले काफी समय से जिस बदलाव की सुगबुगाहट थी, उस पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है। बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) ने खेल को और अधिक रोमांचक और छोटा बनाने के उद्देश्य से स्कोरिंग सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव का ऐलान किया है। 25 अप्रैल को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में बीडब्ल्यूएफ ने दशकों से चले आ रहे 3×21 प्वाइंट सिस्टम को अलविदा कहते हुए 3×15 प्वाइंट सिस्टम को अपनाने का फैसला सुनाया। इस नए नियम के तहत, अब खिलाड़ियों को गेम जीतने के लिए 21 के बजाय केवल 15 अंक हासिल करने होंगे। फेडरेशन का मानना है कि इससे मैचों की अवधि कम होगी और दर्शकों के लिए खेल की गति अधिक तीव्र और आकर्षक हो जाएगी।
जनवरी 2027 से लागू होगा नया नियम: दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित
डेनमार्क के हॉर्सन्स में आयोजित बीडब्ल्यूएफ की वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। नए स्कोरिंग सिस्टम के प्रस्ताव को परिषद में दो-तिहाई बहुमत के साथ पारित किया गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह नया 3×15 फॉर्मेट 4 जनवरी से वैश्विक स्तर पर लागू कर दिया जाएगा। बीडब्ल्यूएफ की अध्यक्ष खुनिंग पटामा लीस्वदत्राकुल ने इस परिवर्तन का बचाव करते हुए कहा कि खेल को वैश्विक प्रसारण और अगली पीढ़ी की पसंद के अनुसार ढलना अनिवार्य है। उन्होंने इसे बैडमिंटन के विकास के लिए एक “अनिवार्य पड़ाव” बताया, हालांकि खेल विशेषज्ञ इसे खेल की सहनशक्ति (Endurance) और रणनीति के साथ समझौता मान रहे हैं।
पीवी सिंधु और साइना नेहवाल ने दर्ज कराई आपत्ति: खेल की मौलिकता पर सवाल
बैडमिंटन जगत के इस फैसले ने भारतीय खेमे को काफी निराश किया है। देश की दो सबसे दिग्गज खिलाड़ी, पीवी सिंधु और साइना नेहवाल, ने इस नए नियम के प्रति अपनी नाखुशी जाहिर की है। साइना नेहवाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “सुधार और आधुनिकीकरण की इस अंधी दौड़ में बैडमिंटन अपनी असल पहचान और चुनौती न खो दे।” वहीं, दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने भी संकेत दिया कि कम अंकों का गेम खिलाड़ियों की लय को प्रभावित कर सकता है। भारतीय सितारों का मानना है कि बैडमिंटन एक ऐसा खेल है जहां खिलाड़ी की धीरज और लंबे गेम की रणनीति उसकी जीत तय करती है, जिसे यह नया नियम पूरी तरह बदल देगा।
विमल कुमार की निराशा: एशियाई देशों की पसंद की अनदेखी का आरोप
भारतीय बैडमिंटन के पूर्व मुख्य कोच विमल कुमार ने बीडब्ल्यूएफ के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि स्कोरिंग प्रणाली में बदलाव का फैसला न केवल निराशाजनक है, बल्कि यह खेल की वास्तविक चुनौतियों का समाधान भी नहीं करता। विमल कुमार ने चिंता जताते हुए कहा, “यह देखकर दुख होता है कि कार्यकारी परिषद ने इसे बिना किसी ठोस विरोध के समर्थन दे दिया। बैडमिंटन विशेष रूप से एशिया में बहुत जुनून के साथ खेला और पसंद किया जाता है। खेल की असलियत को उन व्यावसायिक कारणों से बदला जा रहा है जिनका खेल की गुणवत्ता से कोई लेना-देना नहीं है।”
क्या होगा खेल पर असर? रोमांच बनाम चुनौती की बहस शुरू
15 अंकों के नए सिस्टम से खेल की शैली में भारी बदलाव आने की उम्मीद है। छोटे गेम का मतलब है कि खिलाड़ियों को शुरुआती दौर से ही आक्रामक रुख अपनाना होगा, क्योंकि गलती सुधारने की गुंजाइश कम हो जाएगी। जहां बीडब्ल्यूएफ इसे टीवी दर्शकों के लिए बेहतर मान रहा है, वहीं खिलाड़ियों का तर्क है कि इससे खेल की वह ‘मानसिक मजबूती’ कम हो जाएगी जो 21 अंकों के गेम में देखने को मिलती थी। अब पूरी दुनिया की नजरें जनवरी में होने वाले टूर्नामेंट्स पर टिकी हैं, जब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव बैडमिंटन के भविष्य को किस दिशा में ले जाता है।
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