Budget 2026 Reaction Akhilesh: बजट 2026 पर अखिलेश यादव का बड़ा हमला, बोले- अब गरीब बेटी की विदाई भी होगी मुश्किल!

बजट 2026 को लेकर अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सबसे बड़ा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, जिससे अब गरीब परिवारों के लिए बेटी की विदाई करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। क्या वाकई यह बजट सिर्फ चंद अमीरों के लिए है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 10, 2026

Budget 2026 Reaction Akhilesh: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने लोकसभा में आम बजट पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने संबोधन में अमेरिका के साथ हुई हालिया रक्षा सौदों, किसानों की बदहाली और आसमान छूती महंगाई को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यह बजट केवल देश के 5 प्रतिशत संपन्न लोगों के लिए बनाया गया है, जबकि देश की बहुसंख्यक आबादी को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

सोने-चांदी की कीमतों पर कटाक्ष: “लोहे पर पीतल चढ़ाकर विदाई करेगा गरीब”

बढ़ती महंगाई पर तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सोने और चांदी के भाव आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुके हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “अब तो चांदी भी दूर की कौड़ी हो गई है। अगर यह सरकार इसी तरह चलती रही, तो गरीब आदमी अपनी बेटी की शादी में सोने-चांदी के गहने तो दूर, लोहे पर पीतल की परत चढ़ाकर भी विदाई नहीं कर पाएगा।” उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों को गरीब विरोधी बताते हुए कहा कि यह बजट मध्यम वर्ग की कमर तोड़ने वाला है।

अमेरिका के साथ रक्षा डील पर सवाल: “पहले बजट आया या डील?”

अखिलेश यादव ने अमेरिका के साथ हुए रक्षा समझौतों पर पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने सदन में पूछा कि सरकार यह स्पष्ट करे कि पहले डील तय हुई थी या बजट का प्रावधान किया गया? उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या विदेशी कंपनियों के साथ ये बड़ी डील “आत्मनिर्भरता” की परिभाषा को बदल रही हैं? उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जनता यह जानना चाहती है कि गणित में “जीरो” बड़ा है या “अठारह”, जो सरकार के दावों और हकीकत के अंतर को दर्शाता है।

यूपी की अनदेखी और विजन की कमी: “दिशाहीन है यह बजट”

उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाले इस प्रदेश के लिए बजट में कोई विशेष योजना नहीं है। उन्होंने बजट को पूरी तरह “दिशाहीन” और “विजनलेस” करार दिया। अखिलेश ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो सपना दिखाया जा रहा है, उसकी कोई ठोस रूपरेखा इस बजट में नजर नहीं आती। उनके अनुसार, सरकार ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के उत्थान के बारे में सोचना पूरी तरह बंद कर दिया है।

किसानों की एमएसपी और खाद-बीज की किल्लत पर प्रहार

किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि आज भी किसान एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार दूध उत्पादन पर एमएसपी देने का वादा कैसे पूरा करेगी? अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसानों के बजाय कुछ “अदृश्य लोगों” (कॉर्पोरेट मित्रों) को लाभ पहुँचाने में लगी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को वाकई किसानों की फिक्र होती, तो उन्हें समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराए जाते।

मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई की मूर्ति का मुद्दा

भाषण के अंत में अखिलेश यादव ने सांस्कृतिक धरोहरों के रखरखाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति के साथ हुई कथित तोड़फोड़ की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार विरासत का सम्मान करने का दावा करती है और दूसरी तरफ ऐतिहासिक प्रतीकों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने इस बजट को आम जनता की फिक्र से दूर केवल आंकड़ों की बाजीगरी बताया।

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