BSP Chief Mayawati: ‘भाई तो बहुत बने लेकिन…’ मायावती के बयान ने खींचा सबका ध्यान

बसपा प्रमुख मायावती विधायक उमाशंकर सिंह के अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पहुंचीं। उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और दिवंगत नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

BSP Chief Mayawati

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 6, 2026

BSP Chief Mayawati: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए एक बेहद दुखद और अपूरणीय क्षति भरा समाचार सामने आया है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की महत्वपूर्ण रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा के कद्दावर और कर्मठ विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार रात को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुवार की सुबह उनका पार्थिव शरीर उनके लखनऊ स्थित आवास पर लाया गया, जहाँ बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती उन्हें अंतिम विदाई देने पहुँचीं और उनकी पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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लखनऊ आवास पर उमड़ी भीड़, मायावती ने बंधाया ढाढ़स

गुरुवार सुबह लखनऊ स्थित उमाशंकर सिंह के आवास पर भारी संख्या में उनके रिश्तेदार, समर्थक, पार्टी के नेता और आम लोग इकट्ठा हुए थे। बसपा सुप्रीमो मायावती जब उनके आवास पर पहुँचीं, तो वहाँ का माहौल बेहद गमगीन था। मायावती ने उमाशंकर सिंह के पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाकर उन्हें नमन किया।

इसके बाद, उन्होंने दिवंगत नेता के बेटे और अन्य शोकजदा परिजनों से मुलाकात की। दुख की इस विकट घड़ी में मायावती ने परिवार के सदस्यों को ढाढ़स बंधाया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि बहुजन समाज पार्टी इस संकट की घड़ी में उनके पूरे परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और पार्टी उनका पूरा ख्याल रखेगी।

‘पार्टी में उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने कभी धोखा नहीं दिया’

मीडिया और शोकसभा के बीच उमाशंकर सिंह को याद करते हुए मायावती भावुक हो गईं। उन्होंने दिवंगत विधायक के राजनीतिक सफर और पार्टी के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को याद करते हुए कहा कि उमाशंकर सिंह जब से बहुजन समाज पार्टी से जुड़े, उन्होंने अपनी सभी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया।

मायावती ने उनके राजनीतिक चरित्र की सराहना करते हुए कहा कि उमाशंकर सिंह एक सफल व्यवसायी थे। आमतौर पर देखा जाता है कि जब भी प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होता है या राजनीतिक उतार-चढ़ाव आते हैं, तो कई लोग अपने स्वार्थ के लिए पार्टियां बदल लेते हैं। लेकिन, तमाम परिस्थितियों के बावजूद उमाशंकर सिंह ने कभी बसपा को धोखा नहीं दिया। वे पार्टी के सबसे वफादार और समर्पित विधायकों में से एक थे। उन्होंने न सिर्फ पार्टी का मान बढ़ाया, बल्कि अपने विधानसभा क्षेत्र और पूरे समाज के विकास का भी हमेशा पूरा ध्यान रखा।

‘भाई तो बहुत बने, पर उन्होंने कभी साथ नहीं छोड़ा’

उमाशंकर सिंह के साथ अपने व्यक्तिगत और भावनात्मक रिश्तों को साझा करते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि वे उन्हें अपनी सगी बहन की तरह मानते थे। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन का त्योहार है, और मायावती ने नम आंखों से याद किया कि चाहे वे दिल्ली में रहतीं या लखनऊ में, उमाशंकर सिंह हर साल रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उनसे राखी बंधवाने जरूर आते थे।

उन्होंने भावुक होकर कहा, “भाई तो बहुत बने, लेकिन सब धोखा देकर चले गए। पर इन्होंने कभी धोखा नहीं दिया।” मायावती ने यह भी याद किया कि एक बार जब उमाशंकर सिंह गंभीर रूप से बीमार थे, तब भी वे अपनी खराब सेहत की परवाह किए बिना उनसे मिलने आए थे। उनके निधन से पार्टी को जो क्षति पहुँची है, उसकी भरपाई करना बेहद कठिन है।

परिवार और बेटे को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने का ऐलान

उमाशंकर सिंह के परिवार के भविष्य को लेकर मायावती ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यदि दिवंगत नेता का परिवार और रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के लोग चाहेंगे, तो वे उमाशंकर सिंह के बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाने और हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। पार्टी उनके बेटे को पूरा महत्व और समर्थन देगी। उमाशंकर सिंह के अचानक चले जाने से बसपा ने अपना एक मजबूत स्तंभ खो दिया है, जिसकी कमी पार्टी को हमेशा खलेगी।

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