BRICS 2026: ब्रिक्स अध्यक्षता पर संकट के बादल, कांग्रेस ने पूछा- कहाँ गई मोदी की कूटनीति?

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता भारत के पास है, लेकिन वेस्ट एशिया में जारी भीषण युद्ध पर प्रधानमंत्री मोदी की 'खामोशी' ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस ने सीधा आरोप लगाया है कि मोदी अंतरराष्ट्रीय दबाव में हैं। क्या भारत अपनी कूटनीतिक ताकत खो रहा है? जानिए इस विवाद के पीछे का पूरा सच।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 23, 2026

BRICS 2026: कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर कतई गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्य विपक्षी दल का कहना है कि जब वेस्ट एशिया (पश्चिम एशिया) में तनाव अपने चरम पर है, तो भारत अपनी BRICS+ अध्यक्षता का उपयोग शांति बहाली के लिए क्यों नहीं कर रहा है? कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री इस महत्वपूर्ण मंच के जरिए कोई ठोस कूटनीतिक पहल करने से कतरा रहे हैं, जो उनकी ‘विश्वगुरु’ की छवि के विपरीत है।

जयराम रमेश का आरोप: अमेरिका और इजराइल को खुश रखने की कोशिश?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत इस वर्ष 18वीं BRICS+ समिट की मेजबानी कर रहा है। ऐसे संकट के समय में इस मंच का उपयोग युद्धविराम या समाधान की दिशा में किया जाना चाहिए था। रमेश ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी संभवतः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते, जिसके कारण भारत इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।

फोन कॉल बनाम फेस-टू-फेस कूटनीति: कांग्रेस का तर्क

रमेश ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय संकटों के समय केवल फोन कॉल पर बात करना पर्याप्त नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि फोन कॉल की अपनी सीमाएं होती हैं, जबकि एक समिट (शिखर सम्मेलन) के दौरान दुनिया के दिग्गज नेता जब आमने-सामने बैठकर चर्चा करते हैं, तो अधिक प्रभावी और ठोस परिणाम निकलने की संभावना होती है। कांग्रेस के अनुसार, भारत को एक नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाते हुए सभी सदस्य देशों को एक मेज पर लाना चाहिए था।

सामूहिक बयान की कमी पर सरकार की आलोचना

यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। पिछले सप्ताह भी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि ब्रिक्स का अध्यक्ष होने के बावजूद भारत अब तक वेस्ट एशिया संघर्ष पर कोई सामूहिक आधिकारिक बयान जारी करवाने में विफल रहा है। कांग्रेस ने 21 मार्च को भी सरकार की इस बात के लिए निंदा की थी कि वह अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों पर स्पष्ट रुख अपनाने के बजाय तटस्थ बनी हुई है।

भारत के पास 2026 की अध्यक्षता और विदेश मंत्रालय की तैयारी

उल्लेखनीय है कि 1 जनवरी 2026 को भारत ने ब्राजील से ब्रिक्स की कमान संभाली थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 15 जनवरी को इस सम्मेलन के लोगो, थीम और वेबसाइट का औपचारिक शुभारंभ किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 में रियो डी जनेरियो (ब्राजील) में आयोजित 17वें शिखर सम्मेलन के दौरान ही भारत के विजन को स्पष्ट कर दिया था। भारत इस बार ब्रिक्स को एक जन-केंद्रित और परिणाम-ोन्मुख संगठन के रूप में स्थापित करना चाहता है।

भारत का ब्रिक्स विजन: ‘मानवता पहले’ और ‘ग्लोबल साउथ’

भारत की अध्यक्षता के तहत मुख्य फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर है:

  • मानवता पहले (Humanity First): G20 की तर्ज पर भारत ब्रिक्स को भी आम लोगों के हितों से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

  • नवाचार और लचीलापन: वैश्विक चुनौतियों के लिए आधुनिक तकनीक और सहयोग को बढ़ावा देना।

  • ग्लोबल साउथ की आवाज: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, IMF और विश्व बैंक जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार के जरिए विकासशील देशों को मजबूती देना।

  • आतंकवाद विरोध: सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम और सदस्य देशों के बीच आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करना।

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