UP News: ‘रील्स का पन्ना कभी खत्म नहीं होता’, युवाओं को ब्रजेश पाठक की बड़ी नसीहत

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने युवाओं में बढ़ती मोबाइल और सोशल मीडिया की लत पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रील्स का पन्ना कभी खत्म नहीं होता, इसलिए युवाओं को ज्ञान और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। ब्रेकअप के तनाव से बचने और बच्चों पर नंबरों का दबाव कम करने की भी सलाह दी।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 14, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने युवाओं में बढ़ती मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की लत को लेकर चिंता जताई है। कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा रात-रातभर मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय बिता रहे हैं। वहीं, ब्रेकअप और रिश्तों से जुड़ी परेशानियां भी युवाओं के मानसिक तनाव का कारण बन रही हैं। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया से दूरी बनाकर ज्ञान और अपने भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।

सोशल मीडिया पर बोले ब्रजेश पाठक

डिप्टी सीएम ने युवाओं को समझाते हुए सोशल मीडिया और धार्मिक ग्रंथों के बीच तुलना की। उन्होंने कहा कि रामायण या श्रीमद्भगवद्गीता का एक पन्ना रातभर में पढ़कर खत्म किया जा सकता है, लेकिन सोशल मीडिया की रील्स का पन्ना कभी खत्म नहीं होता। उनके मुताबिक, लगातार रील्स देखने की आदत युवाओं का कीमती समय बर्बाद कर रही है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल की दुनिया में खोने के बजाय पढ़ाई, ज्ञान और अपने लक्ष्य पर ध्यान दें।

ब्रेकअप और रिश्तों के तनाव पर भी ब्रजेश पाठक ने दिया संदेश

ब्रजेश पाठक ने युवाओं के बीच रिश्तों और ब्रेकअप से जुड़ी मानसिक परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई युवा रिश्ते टूटने के बाद रातभर रोते और तनाव में समय बिताते हैं। डिप्टी सीएम ने युवाओं को सलाह दी कि रिश्तों को लेकर अत्यधिक चिंता करने के बजाय अपने भविष्य और ज्ञान पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिश्ते और जोड़ियां ईश्वर तय करते हैं, इसलिए युवाओं को अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए।

बच्चों पर पढ़ाई और नंबरों का दबाव कम करने की अपील

कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम ने शिक्षकों से भी बच्चों पर पढ़ाई और नंबरों का अत्यधिक दबाव नहीं डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों पर सिर्फ अच्छे अंक लाने का बोझ डालने के बजाय उनमें ज्ञान हासिल करने की इच्छा पैदा की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, ‘मार्कशीट का तनाव’ कम करके बच्चों पर ‘ज्ञान का झंझट’ डालने की जरूरत है। इससे बच्चों में सीखने और समझने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

कबीर और रहीम के उदाहरण से समझाया ज्ञान का महत्व

ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में संत कबीरदास और रहीमदास का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि कबीर और रहीम किसी बड़े विश्वविद्यालय के टॉपर नहीं थे, लेकिन उनके ज्ञान और विचारों का प्रभाव आज भी पूरी दुनिया में दिखाई देता है। उनके दोहे आज भी लोगों को जीवन की सीख देते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि सफलता को केवल मार्कशीट और अंकों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

डिप्टी सीएम ने कहा कि समय तेजी से बदल रहा है और आज के दौर में ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण ताकत है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास ज्ञान यानी सरस्वती है तो उसके पास धन यानी लक्ष्मी भी अपने आप आ सकता है। उन्होंने युवाओं को ज्ञान अर्जित करने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने और भविष्य के लिए सही दिशा में मेहनत करने का संदेश दिया।

कानपुर में मोबाइल मेडिकल वैन का हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान मोबाइल मेडिकल वैन का भी शुभारंभ किया गया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, गोल्डी मसाले समूह के निदेशक सुदीप गोयनका और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने हरी झंडी दिखाकर वैन को रवाना किया।

गांवों और दूरदराज इलाकों में मुफ्त स्वास्थ्य जांच

यह मोबाइल मेडिकल वैन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जाकर लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। वैन में ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, ईसीजी, रक्त जांच और नेत्र परीक्षण जैसी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य उन लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जिनके लिए अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना मुश्किल होता है।

युवाओं के लिए ब्रजेश पाठक का संदेश बना चर्चा का विषय

कार्यक्रम में ब्रजेश पाठक ने एक तरफ युवाओं को मोबाइल और सोशल मीडिया की लत से बचने की सलाह दी, तो दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था में अंकों के बढ़ते दबाव पर भी सवाल उठाए। उनका संदेश था कि युवाओं को रील्स और रिश्तों के तनाव में अपना समय गंवाने के बजाय ज्ञान, शिक्षा और भविष्य निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, मोबाइल मेडिकल वैन की शुरुआत से ग्रामीण क्षेत्रों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।