Defence Export India : ब्रह्मोस और आकाश का दुनिया में बढ़ता जलवा, भारत बना बड़ा डिफेंस एक्सपोर्टर

भारत की रक्षा ताकत अब विदेशी बाजारों में भी नई पहचान बना रही है। ब्रह्मोस और आकाश जैसे स्वदेशी मिसाइल सिस्टम के निर्यात से देश की रक्षा क्षमता और रणनीतिक पहुंच बढ़ी है। कई देशों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच नए बाजार खुल रहे हैं। सवाल है—क्या भारत जल्द बड़ा हथियार निर्यातक बनकर उभरेगा?

Defence Export India

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 3, 2026

Defence Export India : भारत का रक्षा निर्यात अब केवल छोटे हथियारों, गोला-बारूद और कलपुर्जों तक सीमित नहीं रह गया है। स्वदेश में विकसित हाईटेक मिसाइल सिस्टम ब्रह्मोस और आकाश अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता की पहचान बन रहे हैं। इन प्रणालियों की विदेशी मांग बढ़ने से भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को भी नई गति मिली है।

ब्रह्मोस बना भारत के लिए बड़ा एक्सपोर्ट प्रोडक्ट

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात का प्रमुख उत्पाद माना जा रहा है। फिलीपींस को करीब 330 मिलियन डॉलर के ब्रह्मोस सिस्टम की आपूर्ति की जा चुकी है। इसके अलावा वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ भी संभावित सौदों की चर्चा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इन संभावित समझौतों के चलते ब्रह्मोस से जुड़ी एक्सपोर्ट पाइपलाइन 600 मिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है।

इंडोनेशिया और वियतनाम से संभावित डील

फिलीपींस के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में भी ब्रह्मोस को लेकर रुचि देखने को मिल रही है। वियतनाम के साथ करीब 100 मिलियन डॉलर और इंडोनेशिया के साथ लगभग 200 मिलियन डॉलर की संभावित डील की जानकारी सामने आई है। अगर ये सौदे आगे बढ़ते हैं, तो विदेशी बाजार में ब्रह्मोस की मौजूदगी और मजबूत हो सकती है।

आकाश मिसाइल की विदेशी बाजार में बढ़ती मांग

भारत का स्वदेशी आकाश सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना रहा है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने विकसित किया है। इसके उत्पादन में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी भारतीय रक्षा कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आकाश सिस्टम को तेज गति से आने वाले हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है।

आकाश और आकाश-NG की क्षमता

आकाश मिसाइल के शुरुआती संस्करण की मारक क्षमता करीब 25 से 30 किलोमीटर बताई जाती है, जबकि आकाश-NG की रेंज लगभग 50 किलोमीटर तक बताई जाती है। नई पीढ़ी के इस सिस्टम में आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है। इसकी क्षमताओं के चलते विदेशी देशों की ओर से भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम में रुचि बढ़ने की बात सामने आती रही है।

आर्मेनिया बना शुरुआती विदेशी ग्राहक

आकाश सिस्टम के लिए आर्मेनिया शुरुआती विदेशी ग्राहकों में शामिल रहा है। इसके बाद ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को भी आकाश सिस्टम के संभावित या किए गए निर्यात को लेकर जानकारी सामने आई है। इन देशों तक भारतीय एयर डिफेंस तकनीक की पहुंच भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादों के लिए बढ़ते अंतरराष्ट्रीय बाजार का संकेत देती है।

2025-26 में रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड

भारत के रक्षा निर्यात में व्यापक स्तर पर बढ़ोतरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का डिफेंस एक्सपोर्ट रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 23,622 करोड़ रुपये के मुकाबले 62.66 प्रतिशत अधिक है। भारत अब 80 से ज्यादा देशों को अलग-अलग तरह के रक्षा उपकरण, सिस्टम और उत्पाद निर्यात कर रहा है।

50 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य पर नजर

भारत सरकार ने आने वाले वर्षों में रक्षा निर्यात को और बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। डिफेंस एक्सपोर्ट को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही देश में रक्षा उत्पादन बढ़ाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने और स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मिसाइलों ने बदली भारत की रक्षा पहचान

ब्रह्मोस और आकाश जैसे सिस्टम भारत की बदलती रक्षा उत्पादन क्षमता को दर्शाते हैं। मिसाइलों के साथ भारत में गाइडेंस सिस्टम, रडार, प्रोपल्शन और कमांड नेटवर्क जैसी तकनीकों के विकास पर भी काम हो रहा है। इन स्वदेशी प्रणालियों के निर्यात से भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में मौजूदगी बढ़ रही है और देश एक बड़े रक्षा खरीदार के साथ-साथ उन्नत सैन्य तकनीक के निर्माता और निर्यातक के रूप में भी अपनी भूमिका विस्तार कर रहा है।

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