Mumbai Mayor: मुंबई का अगला मेयर कौन? शिंदे गुट की अड़चन और उद्धव ठाकरे का मास्टरस्ट्रोक, फंसा महायुति का पेंच

मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में महायुति की बड़ी जीत के बाद मेयर पद को लेकर घमासान शुरू हो गया है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 'होटल पॉलिटिक्स' शुरू करते हुए पार्षदों की बाड़ेबंदी की है, वहीं उद्धव ठाकरे ने वोटिंग के बहिष्कार का दांव चलकर बीजेपी और शिंदे की राह मुश्किल कर दी है।

Mumbai Mayor

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 20, 2026

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कौन बनेगा मुंबई का मेयर? शिंदे की चाल ने BMC की राजनीति में बढ़ाया रोमांच

शिवसेना (शिंदे गुट) की दावेदारी

बताते चले कि, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना मेयर पद पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट की मांग है कि भले ही ढाई-ढाई साल का रोटेशन फॉर्मूला लागू किया जाए, लेकिन पहले कार्यकाल में मेयर उन्हीं की पार्टी का होना चाहिए। इस बीच, हॉर्स ट्रेडिंग और नगरसेवकों के टूटने के डर से शिंदे गुट ने अपने 29 पार्षदों को बांद्रा के एक लग्जरी होटल में शिफ्ट कर दिया है। खुद मुख्यमंत्री ने होटल जाकर अपने पार्षदों से मुलाकात की, जो मुंबई नगर निगम चुनाव के बाद की ‘होटल पॉलिटिक्स’ को दर्शाता है।

उद्धव ठाकरे का मास्टरस्ट्रोक

आपको बता दे कि, मेयर चुनाव की इस रस्साकशी के बीच उद्धव ठाकरे ने एक बड़ा सियासी दांव खेल दिया है। उद्धव गुट का लक्ष्य शिंदे सेना को मेयर की कुर्सी से दूर रखना है। चर्चा है कि यदि बीजेपी मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार उतारती है, तो उद्धव गुट के 65 नगरसेवक वोटिंग के दौरान सदन से अनुपस्थित रह सकते हैं। यदि वोटिंग का बहिष्कार होता है, तो सदन में बहुमत का आंकड़ा गिर जाएगा, जिससे चुनाव की गणित पूरी तरह उलझ जाएगी। उद्धव गुट लगातार ‘जादुई आंकड़े’ का जिक्र कर महायुति पर तंज कस रहा है।

बीजेपी का पलड़ा भारी

भले ही शिंदे गुट अड़ा हुआ हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सबसे बड़े राजनीतिक दल होने के नाते बीजेपी का मेयर पद पर दावा स्वाभाविक और मजबूत माना जा रहा है। गठबंधन की सहयोगी पार्टी आरपीआई (RPI) का मानना है कि महायुति के भीतर आपसी बातचीत से जल्द ही समाधान निकाल लिया जाएगा। बीजेपी नेतृत्व फिलहाल शांति से स्थितियों का आकलन कर रहा है, लेकिन शिंदे की जिद ने गठबंधन के भीतर सत्ता के बंटवारे को जटिल बना दिया है।

मुंबई का अगला मेयर कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुंबई की कमान किसके हाथ में होगी। क्या बीजेपी अपने दम पर मेयर बनाएगी या शिंदे गुट की शर्तों को मानकर गठबंधन को बचाएगी? मेयर के चुनाव में होने वाली क्रॉस वोटिंग का खतरा और उद्धव गुट की रणनीति ने इस मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है। फिलहाल मुंबई को अपने नए मुखिया का इंतजार है, जबकि पर्दे के पीछे नगरसेवक और मेयर चयन को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति अपने चरम पर है।

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