BMC Election Controversy: शिंदे बनाम राउत की जुबानी जंग तेज, संजय राउत ने मुख्यमंत्री को बताया ‘मुंबई का जयचंद’

बीएमसी चुनाव 2026 में महायुति की जीत के बाद संजय राउत ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राउत ने शिंदे की तुलना 'जयचंद' से करते हुए कहा कि उनके कारण ही ठाकरे का किला ढहा है। क्या यह बयान शिवसेना के दोनों गुटों में नई जंग छेड़ेगा? जानिए पूरी खबर!

BMC Election Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 17, 2026

BMC Election Controversy: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजों के बाद मुंबई की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। बीजेपी और उसके सहयोगी एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने मिलकर कुल 118 सीटें जीतीं, जो बहुमत के आंकड़े से चार अधिक हैं। इस जीत ने शहर की राजनीति में नई ऊर्जा और बयानबाज़ी को जन्म दिया।चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि यदि एकनाथ शिंदे शिवसेना से अलग न होते, तो मुंबई में बीजेपी कभी मेयर नहीं बना पाती। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तुलना ऐतिहासिक संदर्भ में ‘जयचंद’ से की और कहा कि मराठी जनता उन्हें इसी रूप में याद रखेगी। इस बयान में राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिंदे को भी टैग किया।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का कड़ा जवाब

संजय राउत के ‘जयचंद’ वाले बयान पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि संजय राउत नारद मुनि और मंथरा का मिला-जुला रूप हैं। दुबे की यह टिप्पणी सीधे तौर पर राउत के शिंदे पर लगाए गए आरोप और तुलना का जवाब थी।संजय राउत और एकनाथ शिंदे के बीच तनाव की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से अलग होकर BJP के साथ सरकार बनाई। उद्धव गुट ने इसे गद्दारी करार दिया। तब से शिंदे को लेकर ‘जयचंद’ शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक बयानबाज़ी में नियमित रूप से होता रहा है।

राजनीतिक विश्लेषण और प्रतिक्रिया

विश्लेषकों का कहना है कि बीएमसी चुनाव के नतीजे केवल चुनावी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि शहर की राजनीति में गठबंधन और व्यक्तिगत दलगत रवैये का संकेत भी हैं। संजय राउत के बयान ने शिंदे और उद्धव गुट के बीच पुरानी राजनीतिक तल्खी को उजागर किया। वहीं, बीजेपी सांसदों और शिंदे गुट की प्रतिक्रिया ने स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक मोर्चे पर स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है।

सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी

निशिकांत दुबे का सोशल मीडिया पोस्ट दर्शाता है कि राजनीतिक बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप अब सोशल मीडिया तक सीमित नहीं हैं। यह दोनों गुटों के बीच चल रहे मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक खेल का हिस्सा है। राजनीति में जनता की प्रतिक्रिया और आगामी चुनावी रणनीतियों पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।बीएमसी चुनावों के नतीजों ने मुंबई की राजनीति में नई बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप को जन्म दिया है। संजय राउत का ‘जयचंद’ बयान और निशिकांत दुबे का जवाब दर्शाता है कि शिंदे और उद्धव गुट के बीच पुराना तनाव अभी भी बरकरार है। शहर की राजनीति में गठबंधन, दलगत खींचतान और व्यक्तिगत विरोधाभास भविष्य में और बयानबाज़ी का कारण बन सकते हैं।

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