Health Tips: ब्लड कैंसर के इलाज में नई उम्मीद, भारत बायोटेक की कंपनी बनाएगी CAR-T थेरेपी

ब्लड कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाने वाली VL-2511 थेरेपी पर भारत में काम आगे बढ़ने जा रहा है। भारत बायोटेक की सहायक कंपनी न्यूसेलियन और वेजेन बायो ने साझेदारी की है। लक्ष्य 2028 तक इसे बाजार में लाने का है, लेकिन मरीजों तक पहुंचने से पहले कई अहम जांच जरूरी हैं।

ब्लड कैंसर के इलाज में नई उम्मीद

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 23, 2026

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Health Tips: ब्लड कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में भारत में एक नई पहल सामने आई है। भारत बायोटेक की सहायक कंपनी न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स ने हैदराबाद की वेजेन बायो के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां मल्टीपल मायलोमा नाम के ब्लड कैंसर के उपचार के लिए नई CAR-T थेरेपी विकसित करने पर काम करेंगी। इस संभावित उपचार का नाम VL-2511 बताया गया है। कंपनियों का लक्ष्य इसे 2028 तक बाजार में लाने की दिशा में आगे बढ़ना है। हालांकि, इसके लिए आगे की जांच और नियामकीय मंजूरी जरूरी होगी।

क्या है मल्टीपल मायलोमा ब्लड कैंसर?

आपको बता दें कि, मल्टीपल मायलोमा एक तरीके का कैंसर है, जो प्लाज्मा कोशिकाओं पर असर डालता है। ये कोशिकाएं सफेद रक्त कोशिकाओं का हिस्सा होती हैं और सामान्य रूप से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भूमिका निभाती हैं। इस बीमारी में असामान्य प्लाज्मा कोशिकाएं बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा में बढ़ने लगती हैं। इससे स्वस्थ रक्त कोशिकाओं के निर्माण पर असर पड़ सकता है। मरीजों में हड्डियों में दर्द, थकान, बार-बार संक्रमण और किडनी से जुड़ी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। कुछ मरीजों में मौजूदा उपचार के बावजूद बीमारी नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण रहता है।

CAR-T थेरेपी कैसे करती है काम?

दरअसल, CAR-T सेल थेरेपी एक विशेष प्रकार का इम्यूनोथेरेपी उपचार है। इसमें मरीज की टी-सेल्स नामक प्रतिरक्षा कोशिकाओं को लेकर प्रयोगशाला में उनमें बदलाव किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य इन कोशिकाओं को कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन पर हमला करने की क्षमता देना है। इसके बाद तैयार की गई कोशिकाओं को मरीज के शरीर में वापस पहुंचाया जाता है। यह उपचार कुछ रक्त कैंसरों में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसकी उपयुक्तता बीमारी के प्रकार, मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय आकलन पर निर्भर करती है।

VL-2511 थेरेपी किन प्रोटीन को बनाएगी निशाना?

VL-2511 थेरेपी किन प्रोटीन को बनाएगी निशाना?
VL-2511 थेरेपी किन प्रोटीन को बनाएगी निशाना?

कंपनियों के मुताबिक, वेजेन बायो की VL-2511 थेरेपी को कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद BCMA और CD19 नामक प्रोटीन को निशाना बनाने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य इन लक्ष्यों की पहचान कर कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय करना है। फिलहाल यह थेरेपी विकास और जांच के चरण में है। इसकी प्रभावशीलता, सुरक्षा और मरीजों के लिए संभावित लाभ का आकलन आगे की वैज्ञानिक जांच और क्लिनिकल ट्रायल के जरिए किया जाना होगा।

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न्यूसेलियन की होगी निर्माण प्रक्रिया विकसित करने की जिम्मेदारी

इस साझेदारी के तहत वेजेन बायो थेरेपी से संबंधित तकनीक उपलब्ध कराएगी, जबकि न्यूसेलियन इसके निर्माण की प्रक्रिया विकसित करने पर काम करेगी। योजना के अनुसार, न्यूसेलियन हैदराबाद स्थित अपनी विशेष सुविधा में थेरेपी तैयार करने और भविष्य में इसका उत्पादन बड़े स्तर पर करने की क्षमता विकसित करेगी। इस तरह दोनों कंपनियां तकनीक और निर्माण से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए उपचार को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगी।

चीन और अमेरिका में भी विकसित की जा रही है थेरेपी

चीन और अमेरिका में भी विकसित की जा रही है थेरेपी
चीन और अमेरिका में भी विकसित की जा रही है थेरेपी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, VL-2511 से जुड़ा क्लिनिकल विकास चीन में किया जा चुका है और अमेरिका में भी इस थेरेपी के विकास पर काम हो रहा है। भारत में इसे आगे की जांच और क्लिनिकल ट्रायल के लिए तैयार करने की योजना है। हालांकि, किसी भी नई कैंसर थेरेपी को मरीजों के लिए उपलब्ध कराने से पहले उसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े प्रमाण जुटाना जरूरी होता है।

2028 तक बाजार में लाने का लक्ष्य, कीमत पर भी नजर

दोनों कंपनियों ने VL-2511 को 2028 तक बाजार में लाने की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही उपचार को कम लागत पर उपलब्ध कराने की कोशिश करने की बात भी कही गई है। हालांकि, निर्धारित समयसीमा पूरी होना आगे के परीक्षणों, नियामकीय मंजूरियों और उत्पादन संबंधी तैयारियों पर निर्भर करेगा। यदि यह थेरेपी आवश्यक मानकों पर खरी उतरती है, तो मल्टीपल मायलोमा के कुछ मरीजों के लिए उपचार का एक अतिरिक्त विकल्प बन सकती है। फिलहाल इसे उपलब्ध इलाज का प्रमाणित विकल्प मानना जल्दबाजी होगी।