BJP का बड़ा प्लान: असम में 18% वोट हासिल करना, कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ी

गुवाहाटी  असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। भगवा खेमा अगर यहां सरकार बनाने में सफल होता है तो असम में यह हैट्रिक होगी। भाजपा ने इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं को असम विधानसभा में 50% वोट लाने का लक्ष्य दिया है। आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में में बीजेपी का वोट शेयर 33.2 % था। वहीं, सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस को उस समय जबरदस्त झटका लगा जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष

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Published On :

फ़रवरी 20, 2026

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गुवाहाटी 

असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। भगवा खेमा अगर यहां सरकार बनाने में सफल होता है तो असम में यह हैट्रिक होगी। भाजपा ने इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं को असम विधानसभा में 50% वोट लाने का लक्ष्य दिया है। आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में में बीजेपी का वोट शेयर 33.2 % था। वहीं, सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस को उस समय जबरदस्त झटका लगा जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ दी।

भाजपा अध्यक्ष के द्वारा दिए गए टारगेट को अगर बीजेपी हासिल कर लेती है तो सभी दलों का सूपड़ा साफ कर देगी। विपक्ष सिर्फ 20-28 सीटों पर सिमट जाएगा। आपको बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता अभी भी कायम है।

कांग्रेस की बात करें तो असम विधानसभा की राह आसान नहीं है। वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे से जहां पार्टी आंतरिक चुनौती से जूझ रही है, वहीं महाजोत में भी सब कुछ ठीक नहीं है। सीट बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करने को लेकर महाजोत के कई घटकदल दबाव बनाए हुए हैं। असम में अप्रैल में चुनाव हो सकते हैं।

तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस असम में पार्टी को एकजुट रखने में विफल रही। भूपेन बोरा ने आखिरकार पार्टी छोड़ दी। पार्टी को डर है कि भूपेन बोरा के साथ उनके भरोसेमंद कई विधायक और नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इससे मतदाताओं में पार्टी की छवि कमजोर होगी। इसके साथ महाजोत में सीट बंटवारा भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। क्योंकि, 2021 के महाजोत में कई बदलाव हुए हैं। एआईयूडीएफ और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) दोनों महाजोत से अलग हो चुके हैं। बीपीएफ अब एनडीए का हिस्सा है, वहीं मौलाना बदरुद्दीन अजमल की अगुआई में एआईयूडीएफ अकेले चुनाव लड़ेगा।

वहीं, असम जातीय परिषद और अखिल गोगोई का रायजोर दल अब महाजोत में शामिल हैं। कांग्रेस ने एजेपी और रायजोर दल दोनों को महाजोत में 11-11 सीट देने की पेशकश की है, पर दोनों दल इससे ज्यादा सीट की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस इन्हें अधिक सीट देती है, तो चुनाव में कांग्रेस को कम सीट पर लड़ना होगा।असम में दूसरे दलों के साथ गठबंधन किए बगैर भाजपा की अगुआई वाले एनडीए को शिकस्त देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है।

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