Controversial: ‘गांधी भारत नहीं पाकिस्तान के राष्ट्रपिता हैं’, BJP विधायक यतनल के बिगड़े बोल

कर्नाटक के कद्दावर भाजपा नेता बसनगौड़ा पाटिल यतनल ने एक बार फिर लक्ष्मण रेखा पार कर दी है। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर ऐसी टिप्पणी की है जिसे सुनकर कांग्रेस ही नहीं, बल्कि खुद बीजेपी भी असहज हो गई है। क्या इस बार यतनल पर गिरेगी अनुशासन की गाज?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 23, 2026

Controversial:  कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक युद्ध छिड़ गया है। विजयपुरा से भाजपा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनल ने महात्मा गांधी को लेकर एक अत्यंत विवादास्पद टिप्पणी की है, जिससे न केवल विपक्षी दल बल्कि स्वयं भाजपा भी असहज नजर आ रही है। एक सार्वजनिक जनसभा को संबोधित करते हुए यतनल ने कहा कि महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता नहीं हैं, बल्कि वे पाकिस्तान के राष्ट्रपिता हैं। उनके इस बयान ने भारतीय इतिहास की स्थापित मान्यताओं पर एक नई बहस छेड़ दी है और राजनीतिक गलियारों में भारी तनाव पैदा कर दिया है।

“वंदे मातरम नहीं तो पाकिस्तान जाओ”: यतनल के कड़े तेवर

यतनल यहीं नहीं रुके, उन्होंने राष्ट्रवाद और देशप्रेम को लेकर भी तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा, “जो लोग वंदे मातरम नहीं गाएंगे या अपनी मातृभूमि को सलाम नहीं करेंगे, उनके लिए भारत में कोई जगह नहीं है। वे उस पाकिस्तान चले जाएं जिसे गांधी ने उन्हें दिया था।” उन्होंने आगे कहा कि इस देश में रहने की पहली शर्त वंदे मातरम कहना है। यतनल ने बाबासाहेब अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए अंबेडकर ही काफी हैं, और वे गांधी को अपना आदर्श या राष्ट्रपिता स्वीकार नहीं करते।

नेहरू नहीं, सुभाष चंद्र बोस थे पहले प्रधानमंत्री: यतनल का नया तर्क

इतिहास को अपने नजरिए से पेश करते हुए विधायक यतनल ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “हम नेहरू को भारत का पहला प्रधानमंत्री नहीं मानते। हमारे लिए स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे।” हालांकि, ऐतिहासिक तथ्य यह है कि नेताजी ने 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार बनाई थी, लेकिन स्वतंत्र भारत के पहले संवैधानिक प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ही थे। यतनल के इन दावों को इतिहासकार राजनीतिक ध्रुवीकरण और तथ्यों को मरोड़ने की कोशिश मान रहे हैं।

विपक्ष का तीखा हमला: कांग्रेस ने पूछा भाजपा से सवाल

यतनल के इस बयान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मंत्री प्रियांक खरगे ने इसे महात्मा गांधी के बलिदान का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने पूरे देश को एकजुट कर आजादी दिलाई, जबकि विभाजन ब्रिटिश नीतियों की उपज थी। खरगे ने भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या पार्टी ऐसे नफरती और विभाजनकारी बयान देने वाले विधायकों पर कोई कार्रवाई करेगी? वहीं, तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे ‘विभाजनकारी राजनीति’ का हिस्सा करार दिया है।

भाजपा ने झाड़ा पल्ला: पार्टी और विधायक के बीच दूरी

जैसे ही विवाद बढ़ा, भाजपा की कर्नाटक इकाई ने तुरंत इस बयान से पल्ला झाड़ लिया। प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने स्पष्ट किया कि यह यतनल का निजी विचार है और पार्टी आधिकारिक तौर पर महात्मा गांधी और डॉक्टर अंबेडकर दोनों का समान रूप से सम्मान करती है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के भीतर एक धड़ा निजी तौर पर यतनल के विचारों का समर्थन करता है, जो पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों और वैचारिक कलह की ओर संकेत करता है। यतनल पहले भी कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे चुके हैं।

आगामी विधानसभा सत्र में गूँज सकता है विवाद

जानकारों का मानना है कि यह मामला शांत होने वाला नहीं है। कर्नाटक विधानसभा के आगामी सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा सकता है, जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राष्ट्रपिता के अपमान को मुद्दा बनाकर कांग्रेस सरकार भाजपा को घेरने की पूरी तैयारी में है। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा आलाकमान अपने इस मुखर विधायक पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या इसे महज एक ‘निजी राय’ बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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