Bihar News: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थितियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इस संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से ईंधन बचाने और अनावश्यक खर्चों में कटौती करने की अपील को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने समय की मांग बताया है। सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं का कहना है कि यह कदम भारत को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव से सुरक्षित रखने के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगा।
बीजेपी का बयान
बताते चले कि, वरिष्ठ भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने प्रधानमंत्री की इस पहल का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजार (Global Economy & Financial Markets) अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। शाहनवाज हुसैन के अनुसार, दुनिया के कई देशों में आर्थिक हालात स्थिर नहीं हैं, ऐसे में भारत को एक उभरती शक्ति के रूप में बचाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीएम मोदी ने एक राष्ट्रीय नेता और कुशल प्रशासक (National Leader & Able Administrator) के तौर पर देश को आने वाले संकट से आगाह कर एक अभिभावक की जिम्मेदारी निभाई है।
जेडीयू की प्रतिक्रिया
जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने प्रधानमंत्री की अपील को यथार्थवादी बताया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दुनिया के सामने आर्थिक अस्थिरता और सप्लाई चेन (Economic Instability & Supply Chain) की गंभीर समस्याएं पैदा कर दी हैं। कुमार ने स्पष्ट किया कि चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का असर सीधा देश की जेब पर पड़ेगा। इसी संदर्भ में पेट्रोल-डीजल की खपत और विदेशी मुद्रा (Fuel Consumption & Foreign Exchange) को बचाना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।
हैदराबाद रैली का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में हैदराबाद में एक रैली के दौरान देश की जनता से सीधा संवाद किया था। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को सुरक्षित रखने के लिए कुछ ठोस उपाय अपनाएं। पीएम ने सुझाव दिया कि कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए लोग ईंधन की बचत, विदेश यात्राओं को टालने और स्वर्ण निवेश (Saving Fuel & Gold Investment) से बचने का प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ संभव हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर से काम करने की संस्कृति को बढ़ावा दें ताकि ईंधन की खपत को न्यूनतम किया जा सके।
वैश्विक शांति की विफलता
जेडीयू नेता नीरज कुमार ने वैश्विक शांति बनाए रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विफलता पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि जब वैश्विक ताकतें संघर्ष रोकने में नाकाम हो रही हैं, तो भारत को अपनी आर्थिक संप्रभुता और वित्तीय सुरक्षा (Economic Sovereignty & Financial Security) के लिए खुद ही कदम उठाने होंगे। सरकार का मानना है कि यदि नागरिक सामूहिक रूप से फिजूलखर्ची और विलासिता की वस्तुओं पर नियंत्रण रखेंगे, तो भारत अंतरराष्ट्रीय संकट के दौर में भी अपनी विकास दर को स्थिर रखने में कामयाब रहेगा।










