Birthright Citizenship: 158 साल पुराने कानून पर ट्रंप की जिद, नए आदेश पर भी कोर्ट की रोक; जानिए पूरा विवाद

Birthright Citizenship: अमेरिका में जन्म से नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की ट्रंप की कोशिश को फिर अदालत से झटका लगा है। नए आदेश पर संघीय जज ने रोक लगाई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी ट्रंप के मूल आदेश को असंवैधानिक ठहरा चुका है। आखिर 14वीं संवैधानिक संशोधन के तहत यह अधिकार इतना अहम क्यों है?

Birthright Citizenship

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 3, 2026

Birthright Citizenship : अमेरिका में जन्मजात नागरिकता यानी Birthright Citizenship को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है। मैरीलैंड की अमेरिकी जिला अदालत की जज डेबोरा एल. बोर्डमैन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस नए कार्यकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके जरिए अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों के नागरिकता अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की गई थी। अदालत का यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

क्लास-एक्शन मामले के अंतिम फैसले तक जारी रहेगी रोक

एपी की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक संबंधित Class-action lawsuit पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता। जज बोर्डमैन ने अपने फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की पूर्व नजीर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत पहले ही अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है।

14वें संशोधन से मिली है जन्मजात नागरिकता की व्यवस्था

अमेरिका में Birthright Citizenship की व्यवस्था संविधान के 14वें संशोधन से जुड़ी है, जिसे 1868 में लागू किया गया था। इसके तहत कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर अमेरिका की सीमा के भीतर जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता हासिल होती है। लंबे समय से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस व्यवस्था में बदलाव या इसे खत्म करने की वकालत करते रहे हैं।

ट्रंप पहले भी नागरिकता सीमित करने का आदेश ला चुके हैं

ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले भी ऐसा कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसमें अवैध तरीके से या अस्थायी स्थिति में अमेरिका में रह रहे लोगों के बच्चों को जन्मजात नागरिकता देने से रोकने की कोशिश की गई थी। इस आदेश को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और जून में अदालत ने प्रशासन के प्रयास को खारिज कर दिया। इसके बाद अगस्त में व्हाइट हाउस ने एक संशोधित और अपेक्षाकृत सीमित आदेश जारी किया।

बर्थ टूरिज्म और कुछ विशेष मामलों पर फोकस

नए आदेश में मुख्य रूप से Birth Tourism को निशाना बनाया गया था। इसका मतलब ऐसे मामलों से है, जहां लोग बच्चे के जन्म के जरिए नागरिकता हासिल करने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं। इसके अलावा विदेशी दूतावासों से जुड़े लोगों, कुछ विशेष संगठनों और अमेरिका द्वारा ‘Alien Enemy’ माने जाने वाले व्यक्तियों के बच्चों के नागरिकता अधिकारों को सीमित करने का प्रयास भी किया गया।

प्रवासी परिवारों में बढ़ा डर और असमंजस

नए आदेश के बाद अमेरिका में रह रहे कई प्रवासी परिवारों के बीच चिंता और भ्रम का माहौल पैदा हो गया। प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले We Are CASA, Asylum Seeker Advocacy Project समेत कई संगठनों ने प्रभावित परिवारों के साथ मिलकर अदालत का रुख किया। याचिकाकर्ताओं ने आदेश के प्रावधानों और प्रशासन की व्याख्या पर गंभीर सवाल उठाए।

‘Alien Enemy’ की व्याख्या पर भी उठे सवाल

याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि प्रशासन ‘Alien Enemy’ शब्द की बेहद व्यापक और अस्पष्ट व्याख्या कर रहा है। परिवारों को आशंका थी कि केवल अमेरिका की यात्रा या किसी दूर के रिश्तेदार के कथित आपराधिक संबंधों जैसी परिस्थितियों के आधार पर बच्चों की नागरिकता पर सवाल खड़ा किया जा सकता है। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति परिवारों के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।

सरकार ने रोक को बताया समय से पहले

सुनवाई के दौरान अमेरिकी सरकार के वकीलों ने अदालत से आदेश पर रोक नहीं लगाने की अपील की। उनका तर्क था कि संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से अभी आधिकारिक दिशानिर्देश जारी किए जाने बाकी हैं। इसलिए प्रशासन के आदेश को लागू होने से पहले ही रोक देना जल्दबाजी होगी और एजेंसियों को अपनी प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

अदालत ने सरकार की दलील को किया खारिज

जज बोर्डमैन ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि भविष्य में जारी होने वाली गाइडलाइंस चाहे जैसी भी हों, वर्ष 2026 का कार्यकारी आदेश बच्चों की नागरिकता को सीधे प्रभावित करने वाला निर्देश देता है। इसलिए आदेश पर अंतरिम रोक लगाना जरूरी है, ताकि मामले की अंतिम सुनवाई तक प्रभावित बच्चों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

मानवाधिकार संगठनों ने फैसले का किया स्वागत

अदालत के फैसले के बाद मानवाधिकार और प्रवासी अधिकार संगठनों ने राहत जताई। संगठनों का कहना है कि कार्यपालिका बच्चों के संवैधानिक अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी फैसलों से ऊपर नहीं हो सकती। अब इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर है और अंतिम फैसला यह तय करेगा कि ट्रंप प्रशासन का संशोधित आदेश भविष्य में लागू रह पाएगा या नहीं।

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