100 घंटे की जंग में अरबों स्वाहा: ईरान से भिड़ंत में US को 31 हजार करोड़ का झटका

वाशिंगटन ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले का आज (शुक्रवार, 6 मार्च को) सातवां दिन है। शुक्रवार को अमेरिका ने स्टेल्थ बॉम्बर और एडवांस्ड वेपन सिस्टम से ईरान पर हमला बोला है। बदले में ईरान भी इजरायल पर और मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बना रहा है। इस बीच, अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने युद्ध के लागत पर एक विश्लेषण में कहा है कि ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के तहत पहले 100 घंटों में ही अमेरिका को लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 31,000 करोड़ रुपये)

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Published On :

मार्च 6, 2026

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वाशिंगटन
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले का आज (शुक्रवार, 6 मार्च को) सातवां दिन है। शुक्रवार को अमेरिका ने स्टेल्थ बॉम्बर और एडवांस्ड वेपन सिस्टम से ईरान पर हमला बोला है। बदले में ईरान भी इजरायल पर और मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगातार निशाना बना रहा है। इस बीच, अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने युद्ध के लागत पर एक विश्लेषण में कहा है कि ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के तहत पहले 100 घंटों में ही अमेरिका को लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 31,000 करोड़ रुपये) का खर्च उठाना पड़ा है।

यह आकलन वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक CSIS के विशेषज्ञों मार्क कैंसियन और क्रिस पार्क द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के शुरुआती 100 घंटों में अमेरिका का औसत खर्च लगभग 891 मिलियन डॉलर प्रतिदिन यानी करीब 90 करोड़ डॉलर रोज रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में सबसे अधिक खर्च महंगे हथियारों, मिसाइलों और बमों के इस्तेमाल पर हुआ है, इसलिए शुरुआती दिनों में लागत सबसे ज्यादा है।

हथियारों पर खर्च
थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.7 अरब डॉलर पेट्रियट जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर सिस्टम पर खर्च किए गए हैं, जबकि 1.5 अरब डॉलर मिसाइलों और अन्य आक्रामक हथियारों पर किए गए हैं। इसके अलावा 125 मिलियन डॉलर लड़ाकू विमानों और हवाई अभियानों के परिचालन पर खर्च किए गए हैं। CSIS के मुताबिक कुल खर्च में से केवल लगभग 200 मिलियन डॉलर ही पहले से अमेरिकी रक्षा बजट में शामिल था, जबकि करीब 3.5 अरब डॉलर का खर्च अतिरिक्त है, जिसके लिए अलग से फंड की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी United States Department of Defense (पेंटागन) को जल्द ही युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त बजट की मांग करनी पड़ सकती है।

2000 से ज्यादा हथियारों का इस्तेमाल
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि युद्ध के पहले 100 घंटों में अमेरिका ने 2,000 से अधिक प्रकार के हथियार और मिसाइलें इस्तेमाल कीं हैं। इन हथियारों के स्टॉक को दोबारा भरने में ही लगभग 3.1 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा चला तो यह खर्च और तेजी से बढ़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यदि युद्ध जारी रहता है तो अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सरकार को कांग्रेस से अतिरिक्त बजट की मंजूरी लेनी पड़ सकती है लेकिन अमेरिका में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और युद्ध के कारण बढ़ती तेल कीमतों के चलते यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का कारण भी बन सकता है।

मानवीय नुकसान भी भारी
थिंक टैंक ने अपने आकलन में कहा है कि युद्ध का मानवीय नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में अमेरिकी और इजरायली हमलों में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। साथ ही क्षेत्र के अन्य देशों में भी हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण कई लोगों की जान गई है। खर्च के अलावा, कुवैत में 'फ्रेंडली फायर' की घटना में तीन F-15 लड़ाकू विमानों के नष्ट होने जैसी खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान अभी कई हफ्तों तक जारी रह सकता है। ऐसे में इसका आर्थिक और राजनीतिक असर अमेरिका सहित पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

 

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