Bihar Politics: सरकारी आवास पर राजनीति तेज, RJD के 22 सवालों के घेरे में सम्राट चौधरी

राबड़ी देवी को मिले आवास खाली करने के नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। आरजेडी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से 22 तीखे सवाल पूछकर सियासी बहस छेड़ दी है। आखिर इन सवालों के पीछे क्या है और क्या सरकार इनके जवाब देने के लिए तैयार है?

सरकारी आवास पर राजनीति तेज

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 1, 2026

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों सरकारी आवासों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने के नोटिस के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे राजनीतिक प्रताड़ना करार देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने मुख्यमंत्री से 22 सवाल पूछे हैं और सरकारी आवासों के आवंटन में कथित अनियमितताओं पर जवाब मांगा है।

पीडब्ल्यू सचिव सख्त, मंजूर कार्यों की टेंडर प्रक्रिया 30 जून तक पूरी करने के आदेश

राबड़ी देवी को नोटिस 

सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के बाद आरजेडी नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का आरोप है कि विपक्षी नेताओं को परेशान करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में आरजेडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट जारी कर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से कई सवाल पूछे। पार्टी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने अपने सरकारी आवास का दायरा बढ़ाते हुए आसपास के कई बंगले अपने परिसर में शामिल कर लिए हैं। आरजेडी का कहना है कि मुख्यमंत्री का वर्तमान आवास आकार और सुविधाओं के मामले में देश के कई बड़े सरकारी आवासों से भी बड़ा हो चुका है।

मुख्यमंत्री आवास के विस्तार पर उठे सवाल

आरजेडी ने सवाल उठाया कि उपमुख्यमंत्री के लिए निर्धारित सरकारी आवास को मुख्यमंत्री आवास परिसर में किस नियम के तहत शामिल किया गया। पार्टी का आरोप है कि पहले से तय नियमों को दरकिनार कर आवासों का पुनर्गठन किया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर “लोक सेवक आवास” रखने के फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरजेडी का कहना है कि नाम बदलने के पीछे कहीं बड़े परिसर और अतिरिक्त सुविधाओं को वैध ठहराने की कोशिश तो नहीं की गई।

कई नेताओं और पूर्व पदाधिकारियों

आरजेडी ने विभिन्न नेताओं, पूर्व मंत्रियों, सांसदों और आयोगों से जुड़े पदाधिकारियों को आवंटित सरकारी आवासों पर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने पूछा है कि कई ऐसे लोग, जो वर्तमान में किसी संवैधानिक या सरकारी पद पर नहीं हैं, उन्हें बड़े सरकारी बंगले किस आधार पर दिए गए हैं। पार्टी ने यह भी जानना चाहा है कि कुछ नेताओं को एक से अधिक आवास आवंटित किए जाने के पीछे क्या नियम हैं और क्या यह सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास को लेकर भी उठाए प्रश्न

आरजेडी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी को आवंटित सरकारी आवासों का मुद्दा भी उठाया। पार्टी का कहना है कि यदि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास मिल सकते हैं, तो फिर लालू प्रसाद यादव को उसी आधार पर आवास देने में आपत्ति क्यों है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि यदि कुछ राजनीतिक परिवारों को अलग-अलग सरकारी आवास उपलब्ध कराए जा सकते हैं, तो लालू यादव और राबड़ी देवी को अलग-अलग आवास क्यों नहीं दिए जा सकते।

सरकारी आवास नीति पर पारदर्शिता की मांग

आरजेडी ने सरकार से सभी सरकारी आवासों की आवंटन सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि किन लोगों को किस आधार पर सरकारी बंगले दिए गए हैं और क्या आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप है।

UP News: यूपी में अपराधियों की खैर नहीं! DGP राजीव कृष्ण ने जारी किया 1 साल का रिपोर्ट कार्ड

सियासी बहस के केंद्र में आया बंगला विवाद

सरकारी आवासों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। एक ओर सरकार अपने फैसलों को नियमों के अनुरूप बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक भेदभाव और सत्ता के दुरुपयोग का मामला बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है, क्योंकि आरजेडी द्वारा उठाए गए सवालों पर अब सरकार के जवाब का इंतजार किया जा रहा है।