Bihar Politics: बिहार के राजनीतिक गलियारों में नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार (30 मार्च, 2026) को नीतीश कुमार ने विधान परिषद (MLC) के अपने पद से इस्तीफा दिया। इस इस्तीफे के तुरंत बाद, राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी JDU के खिलाफ राजद (RJD) ने सवाल उठाए हैं। RJD एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस्तीफे पर फर्जी हस्ताक्षर की संभावना पर टिप्पणी की है।
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फर्जी हस्ताक्षर की आशंका
सुनील कुमार सिंह ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “छोटे पद का भी इस्तीफा ऑथराइज्ड पर्सन के सामने देना होता है, अतः जांच होनी चाहिए कि इस्तीफा पत्र पर हस्ताक्षर असली हैं या नकली।” उनके इस बयान से यह स्पष्ट है कि उन्होंने सीधे तौर पर नीतीश कुमार का नाम नहीं लिया, लेकिन संदर्भ साफ है। राजद का कहना है कि इस्तीफा देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, और इसे राजनीतिक दृष्टि से गंभीर मामला माना जा रहा है।
इस्तीफा पत्र विधान परिषद में
इस्तीफा पत्र को लेकर JDU के एमएलसी संजय गांधी विधान परिषद पहुंचे थे। नीतीश कुमार ने इस्तीफा उनके माध्यम से भेजा और इसे स्वीकार भी कर लिया गया। हालांकि, राजद का मानना है कि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है और हस्ताक्षर की प्रामाणिकता पर संदेह किया जाना चाहिए।
अशोक चौधरी के आंसू पर भी निशाना
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उनके करीबी नेता अशोक चौधरी मीडिया के सामने भावुक नजर आए। इस पर भी सुनील कुमार सिंह ने तंज कसा और लिखा, “ब्लूटूथ बच्चा के घड़ियाली आंसू का मतलब क्या है? जो पूरी पटकथा का असली साजिशकर्ता में एक है!” यह बयान अशोक चौधरी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधता है और राजनीतिक विवाद को और बढ़ा रहा है।
नीतीश कुमार की आगे की योजना
नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं और रिपोर्ट के अनुसार, 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण के बाद ही वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। फिलहाल उन्होंने केवल विधान परिषद का पद छोड़ा है। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया है और अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सियासी गलियारों में अनुमान लगाए जा रहे हैं।
राजनीतिक असर
नीतीश कुमार के एमएलसी इस्तीफे और उसके बाद उठाए गए सवाल राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर रहे हैं। राजद द्वारा फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगाने के बाद यह मुद्दा मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सियासत में नई रणनीतियों और गठबंधनों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि नीतीश कुमार का एमएलसी पद से इस्तीफा सिर्फ एक औपचारिक कदम नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक रणनीतियों और सियासी दबावों की गहरी छाया भी नजर आ रही है।









