Bihar Flood: गंडक समेत कई नदियां उफान पर, बाढ़ का खतरा बढ़ा; सरकार अलर्ट

बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। गंडक, गंगा, कोसी और बूढ़ी गंडक समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सरकार ने अगले 48 घंटे विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। आखिर किन जिलों पर सबसे ज्यादा असर है?

Bihar Flood

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 2, 2026

Bihar Flood : नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के बाद बिहार में बाढ़ का संकट और गंभीर हो गया है। गुरुवार को गंडक नदी कई स्थानों पर अब तक दर्ज उच्चतम बाढ़ स्तर यानी एचएफएल से ऊपर बहती रही। इससे नदी के दोनों तटबंधों पर पानी का दबाव बढ़ गया है। राज्य सरकार ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने गंगा के बढ़ते जलस्तर का लिया जायजा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में जेपी गंगा पथ पहुंचकर गंगा के बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बाढ़ की स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क है और अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं।

राहत के लिए वायुसेना से मांगी गई मदद

बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने भारतीय वायुसेना से भी सहायता मांगी है। अधिकारियों के मुताबिक दो वायुसेना हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में राहत पैकेट पहुंचाए जाएंगे। इन पैकेटों में चूड़ा, चना, सत्तू, चीनी, मसाले, ओआरएस, माचिस, मोमबत्तियां और दूसरी जरूरी सामग्री शामिल की गई है।

राहत पैकेट की गुणवत्ता की मुख्यमंत्री ने की जांच

मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल स्थित पैकेजिंग केंद्र का निरीक्षण कर राहत पैकेटों की गुणवत्ता और उनमें रखी सामग्री की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खाद्य सामग्री और जरूरी सामान के वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री समय पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।

गंडक के तटबंधों पर बढ़ा भारी दबाव

जल संसाधन विभाग के अनुसार गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक का जलस्तर करीब 36 घंटे तक उच्चतम बाढ़ स्तर से लगभग 22 सेंटीमीटर ऊपर रहा। वहीं रेवा घाट और वैशाली के लालगंज में भी नदी का पानी एचएफएल से करीब 22 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया। लगातार ऊंचे जलस्तर के कारण दोनों तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है।

दो जगह तटबंध टूटने से बढ़ी चिंता

बुधवार रात सारण जिले के पनापुर प्रखंड में दायां सारण तटबंध टूट गया। इसके अलावा मुजफ्फरपुर के साहेबगंज प्रखंड में तिरहुत मुख्य तटबंध के अंतर्गत आने वाला रिंग तटबंध भी टूट गया। इन घटनाओं के बाद आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है तथा प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य तेज करना पड़ा है।

गंगा भी खतरे के निशान से ऊपर

गंगा नदी भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पटना के गांधी घाट पर जलस्तर 49.67 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.07 मीटर अधिक है। हथीदह में पानी 42.49 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 0.73 मीटर ऊपर है। इससे गंडक पर पानी का दबाव भी बढ़ रहा है।

बागमती और बूढ़ी गंडक का भी बढ़ा जलस्तर

बिहार की दूसरी नदियों में भी जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी रहा। बेनीबाद में बागमती का पानी 50.03 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 1.35 मीटर ऊपर है। खगड़िया में बूढ़ी गंडक 36.96 मीटर पर दर्ज हुई, जो खतरे के निशान से 0.38 मीटर ज्यादा है। कई निगरानी केंद्रों पर जलस्तर बढ़ने की प्रवृत्ति दर्ज की गई।

गंडक और कोसी का प्रवाह फिलहाल घटा

वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक का पानी का प्रवाह गुरुवार सुबह 95,340 क्यूसेक रहा, जो पिछली रात के 99,505 क्यूसेक से कम है। बीरपुर में कोसी का प्रवाह भी 67,564 से घटकर 46,743 क्यूसेक हो गया। इंद्रपुरी बैराज में सोन नदी का प्रवाह 1,14,000 से घटकर 1,02,100 क्यूसेक दर्ज किया गया।

कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का असर

नदियों के बढ़ते जलस्तर से बिहार के कई जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का प्रभाव पड़ा है। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सुपौल, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल प्रभावित जिलों में शामिल हैं। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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