Bihar Cabinet Expansion : दिल्ली से लौटे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नए मंत्रियों की सूची तैयार

बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका! मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली से मंत्रियों की फाइनल लिस्ट लेकर पटना पहुंच चुके हैं। बीजेपी और जदयू के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर चली लंबी खींचतान क्या अब खत्म हो गई है? कौन होंगे वो नए चेहरे जो सम्राट सरकार में संभालेंगे अहम मंत्रालय?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 23, 2026

Bihar Cabinet Expansion : बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपना दिल्ली का महत्वपूर्ण दौरा पूरा कर पटना वापस लौट आए हैं। राजनीतिक गलियारों और विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री अपने साथ संभावित मंत्रियों की एक गोपनीय सूची लेकर आए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। जानकारों का मानना है कि 24 अप्रैल को होने वाले फ्लोर टेस्ट के बाद, मई महीने के शुरुआती सप्ताह में नई कैबिनेट का गठन कर लिया जाएगा। यह विस्तार राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को गति देने के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री से शिष्टाचार भेंट के मायने: बिहार सरकार के नए स्वरूप पर मंथन

मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी की यह पहली राष्ट्रीय राजधानी यात्रा थी। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे एक ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता संतुलन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन के भविष्य, सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों और विशेष रूप से मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है।

नितिन नवीन को मिली बड़ी जिम्मेदारी: पुराने चेहरों की जगह नए दिग्गजों को मौका

सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार कैबिनेट विस्तार के लिए समन्वय की जिम्मेदारी भाजपा के कद्दावर नेता नितिन नवीन को सौंपी है। इस बार भाजपा अपने कोटे से मंत्रियों का चयन करते समय ‘परफॉर्मेंस’ और ‘जातीय समीकरण’ दोनों पर विशेष ध्यान दे रही है। संकेत मिल रहे हैं कि इस फेरबदल में कई पुराने और दिग्गज चेहरों की छुट्टी की जा सकती है। उनकी जगह संगठन के प्रति समर्पित और युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि आने वाले चुनावों में एक नया और ऊर्जावान संदेश दिया जा सके।

प्रशासनिक कामकाज पर असर: फिलहाल मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों के भरोसे सरकार

बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति काफी अनोखी है। सरकार का गठन हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन फिलहाल पूरी कैबिनेट लगभग खाली पड़ी है। वर्तमान में केवल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जनता दल (यूनाइटेड) कोटे से दो उपमुख्यमंत्री, बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी ही शपथ लेकर कार्यभार संभाल रहे हैं। भाजपा कोटे से अभी तक किसी भी विधायक को मंत्री पद की शपथ नहीं दिलाई गई है। मंत्रियों की इस कमी के कारण कई विभागों की फाइलें रुकी हुई हैं और प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी हो रही है, जिससे शासन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

बिहार में 33 मंत्रियों का प्रावधान: 24 अप्रैल के फ्लोर टेस्ट पर टिकी सबकी नजरें

संवैधानिक नियमों के अनुसार, बिहार कैबिनेट में अधिकतम 33 मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक संतुलित मंत्रिमंडल तैयार करना है। इस बीच, 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगे। यह बिहार की राजनीति का एक ऐतिहासिक मोड़ है, क्योंकि पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री और जदयू के दो उपमुख्यमंत्री मिलकर सरकार चला रहे हैं। विश्वास मत हासिल करने के तुरंत बाद नई कैबिनेट की औपचारिक घोषणा होने की प्रबल संभावना है।

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