Bhutan PM Modi Stupa : भूटान ने प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया पवित्र स्तूप, भारत-भूटान की दोस्ती को मिला सम्मान

भूटान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसा सम्मान मिला है, जो सामान्य नहीं माना जाता। राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने 108 पवित्र बौद्ध स्तूपों में से एक स्तूप मोदी को समर्पित किया है। आखिर इस स्तूप का नंबर 76 ही क्यों चुना गया और इसके पीछे क्या है खास वजह?

Bhutan PM Modi Stupa

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 3, 2026

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Bhutan PM Modi Stupa : भारत और भूटान के बीच गहरी दोस्ती और मजबूत होते रिश्तों की एक नई तस्वीर सामने आई है। भूटान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष सम्मान देते हुए एक पवित्र बौद्ध स्तूप समर्पित किया है। यह स्तूप भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में बनाए गए 108 स्तूपों में शामिल है। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने स्तूप संख्या 76 को प्रधानमंत्री मोदी के नाम समर्पित किया। इसे भारत के सहयोग, प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों के प्रति आभार के रूप में देखा जा रहा है।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना से जुड़ा सम्मान

भूटान के इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और भारत-भूटान संबंधों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा जा रहा है। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी भूटान की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को आगे बढ़ाना है। इस परियोजना के विकास में भारत लगातार सहयोग करता रहा है। इसी योगदान और दोनों देशों की स्थायी मित्रता को सम्मान देने के लिए स्तूप संख्या 76 प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित किया गया है।

एक ही दिन में तैयार किए गए 108 बौद्ध स्तूप

भूटान के राजा की परिकल्पना पर आधारित ‘प्रोजेक्ट 108’ के तहत हजारों स्वयंसेवकों ने एक अनूठा निर्माण कार्य पूरा किया। असम की सीमा के पास स्थित गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में आई (माउ) नदी के किनारे एक ही दिन में 108 बौद्ध स्तूपों का निर्माण किया गया। इन स्तूपों को जांगचुप चोर्टेन कहा जाता है। परियोजना के तहत प्रत्येक स्तूप की ऊंचाई 15 मीटर रखी गई है, जबकि दो स्तूपों के बीच 108 मीटर की दूरी निर्धारित की गई है। यह सामूहिक प्रयास भूटान की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है।

स्तूप संख्या 76 पर हुई विशेष प्रार्थना

108 स्तूपों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर विशेष धार्मिक समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक, प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे और भारत की ओर से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू शामिल हुए। समारोह के दौरान सभी ने स्तूप संख्या 76 पर सामूहिक रूप से प्रार्थना की। यह आयोजन बौद्ध परंपराओं और भारत-भूटान की आध्यात्मिक साझेदारी को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर रहा।

रिजिजू बोले- पवित्र स्तूप समर्पित करना बड़ा सम्मान

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भूटान के इस फैसले पर आभार जताते हुए इसे भारत के लिए बहुत बड़ा सम्मान बताया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को पवित्र स्तूप समर्पित करना कोई सामान्य बात नहीं है। बौद्ध धर्म में स्तूप केवल स्मारक नहीं, बल्कि बुद्ध के प्रबुद्ध मन का भौतिक स्वरूप माना जाता है। उन्होंने भूटान के राजा का विशेष धन्यवाद किया और कहा कि यह सम्मान भारत तथा भूटान के बीच अनूठी, आध्यात्मिक और स्थायी मित्रता की गहरी समझ को दर्शाता है।

ल्हाबाब दुचेन पर हुआ पवित्र आयोजन

रिजिजू ने कहा कि उन्हें गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में आयोजित इस पवित्र समारोह में शामिल होने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। यह कार्यक्रम बौद्ध धर्म के पावन अवसर ‘ल्हाबाब दुचेन’ पर आयोजित किया गया था। इस दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्र डुंगचेन भी बजाए गए। 108 स्तूपों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा के साथ भूटान ने अपनी आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित किया। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी को स्तूप समर्पित किए जाने को दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और मित्रता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

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