Bhooth Bangla Review: अगर आप अक्षय कुमार के पुराने कॉमिक अंदाज के फैन हैं और प्रियदर्शन की फिल्मों की याद आज भी ताज़ा है, तो भूत बंगला आपके लिए एक मजेदार विकल्प साबित हो सकती है। यह फिल्म हल्की-फुल्की कॉमेडी और हॉरर का मिश्रण है, जिसे आप पूरे परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं। खासतौर पर हाल ही में आई गंभीर फिल्मों के बाद यह एक राहत देने वाली एंटरटेनिंग फिल्म लगती है।
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कहानी

फिल्म की कहानी अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो लंदन से भारत अपने पुश्तैनी महल में लौटते हैं। उनका उद्देश्य अपनी बहन की शादी करवाना है, लेकिन महल में एक रहस्यमयी और डरावना साया मंडरा रहा है। यहां ‘वधु सुर’ नाम का एक राक्षस है, जो दुल्हनों को उठा ले जाता है। ऐसे में शादी कैसे होगी और इस रहस्य से कैसे निपटा जाएगा, यही फिल्म का मुख्य प्लॉट है। कहानी में सस्पेंस और कॉमेडी का संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।
फिल्म कैसी है
फिल्म कुल मिलाकर एक औसत मनोरंजक अनुभव देती है। इसमें कुछ नया या अलग देखने को नहीं मिलता, लेकिन प्रियदर्शन की पुरानी फिल्मों जैसा स्वाद जरूर मिलता है। फिल्म का पहला हिस्सा ज्यादा मजेदार और कॉमिक है, जबकि दूसरा हिस्सा थोड़ा हॉरर की तरफ झुकता है। इंटरवल एक अच्छे मोड़ पर आता है, जिससे दर्शकों की उत्सुकता बनी रहती है।
हालांकि, सेकेंड हाफ थोड़ा लंबा और कुछ जगहों पर कमजोर लगता है। क्लाइमैक्स में ट्विस्ट है, जो चौंकाता जरूर है, लेकिन फिल्म में लॉजिक कई जगहों पर नजरअंदाज किया गया है। यह ऐसी फिल्म है जिसमें ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है। वीएफएक्स और म्यूजिक औसत हैं, और गानों में भी कोई खास यादगार नहीं बन पाया, सिवाय एक-दो ट्रैक्स के।
एक्टिंग
अक्षय कुमार ने अपने पुराने अंदाज में वापसी की है, जो उनके फैंस को जरूर पसंद आएगी। राजपाल यादव अपनी कॉमिक टाइमिंग से फिर से हंसी का तड़का लगाते हैं। परेश रावल भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं और इन तीनों की तिकड़ी फिल्म की जान बन जाती है।
इसके अलावा असरानी को स्क्रीन पर देखना एक सुखद अनुभव है। तब्बू हर सीन में प्रभाव छोड़ती हैं। वहीं वामिका गब्बी फिल्म में कम नजर आती हैं, जबकि प्रमोशन में उनकी मौजूदगी ज्यादा थी। जिशु सेनगुप्ता और मिथिला पालकर ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।
राइटिंग और डायरेक्शन
फिल्म की कहानी आकाश कौशिक ने लिखी है, जो कि नई नहीं लगती और पहले भी कई फिल्मों में इसी तरह की कहानी देखी जा चुकी है। प्रियदर्शन का निर्देशन उनकी पुरानी फिल्मों जैसा ही है—सिंपल, हल्का और एंटरटेनिंग। हालांकि, यह स्टाइल हर नई पीढ़ी के दर्शकों को पसंद आए, यह जरूरी नहीं।









