भोजशाला विवाद: 18 फरवरी को होगी अगली सुनवाई, अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण स्थगित

 इंदौर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में होने वाली सुनवाई आगे बढ़ गई है।कल  अधिवक्ता संघ द्वारा की गई हड़ताल की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया है। इसके लिए न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में यह प्रकरण क्रम संख्या- 62 पर सूचीबद्ध किया गया था। यह सुनवाई गत 22 जनवरी को दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रारंभ की जानी है। सुनवाई में भोजशाला को लेकर किए गए 98 दिनों के एएसआई सर्वे की रिपोर्ट

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Published On :

फ़रवरी 17, 2026

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 इंदौर
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में होने वाली सुनवाई आगे बढ़ गई है।कल  अधिवक्ता संघ द्वारा की गई हड़ताल की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया है। इसके लिए न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में यह प्रकरण क्रम संख्या- 62 पर सूचीबद्ध किया गया था।

यह सुनवाई गत 22 जनवरी को दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रारंभ की जानी है। सुनवाई में भोजशाला को लेकर किए गए 98 दिनों के एएसआई सर्वे की रिपोर्ट खुली अदालत में खोली जाएगी और उसकी कॉपी दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था।

बता दें कि हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष सुनवाई में याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फार जस्टिस एएसआई सर्वे को आधार बनाकर भोजशाला के वाग्देवी (देवी सरस्वती) मंदिर होने के पक्ष में अपने तर्क रखने हैं। इसके लिए हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल उपस्थित रहेंगे, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन (नई दिल्ली) तथा अधिवक्ता विनय जोशी (इंदौर) पैरवी करेंगे।

निर्णय होने तक 2003 का आदेश प्रभावशील

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय तक भोजशाला की संरचना एवं स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसका सात अप्रैल 2003 को एएसआई महानिदेशक द्वारा जारी आदेश यथावत प्रभावी रहेगा।

एएसआई सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष

17000 अवशेष मिले थे। 96 मूर्तियां प्राप्त हुईं। 25 फीट से अधिक खुदाई में दीवार का ढांचा मिला। पीछे के खेत क्षेत्र से भी मूर्तियां बरामद की गईं। चारों दिशाओं में 106 स्तंभ पाए गए। 82 भित्ति चित्रयुक्त स्तंभ मिले। 33 प्राचीन सिक्के मिले। ये सिक्के 10वीं–11वीं शताब्दी एवं परमार युग के बताए गए हैं।

 

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