India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आपत्ति जताते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला है। करीमनगर में एक जनसभा के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत को धमकी दे रहे हैं कि यदि रूस से तेल आयात किया गया तो 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। ओवैसी ने सवाल उठाया—“भारत का पेट्रोलियम मंत्री ट्रंप हैं या हरदीप सिंह पुरी?”
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आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पर सवाल
ओवैसी ने कहा कि सरकार बार-बार ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की बात करती है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत घरेलू विनिर्माण में भारी निवेश किया गया है। लेकिन अमेरिकी व्यापार समझौते के तहत टैरिफ कम करने की प्रतिबद्धता से अमेरिकी औद्योगिक सामान भारत में भर सकता है, जिससे स्थानीय उद्योगों को नुकसान होगा। उन्होंने पूछा कि ऐसे में पीएलआई योजना और पिछड़े क्षेत्रों का क्या होगा।
किसानों और कृषि बाजार की चिंता
ओवैसी ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ट्रंप से 550 अरब डॉलर के व्यापार का वादा करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो किसानों की पैदावार और कृषि बाजार पर गंभीर असर पड़ेगा। अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर आरोप
ओवैसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने व्हाइट हाउस के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका भारत के अनुपालन पर नज़र रखेगा और यदि रूस से तेल आयात फिर शुरू हुआ तो अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों का उल्लेख किया, जिसमें चीन के साथ 2020 के लद्दाख गतिरोध का जिक्र है।
चीन पर टिप्पणी
ओवैसी ने आरोप लगाया कि चीन सारा सस्ता तेल खरीद रहा है और भारत नुकसान में है। उन्होंने कहा कि चीनी सेना ने भारतीय गश्ती क्षेत्रों में दो महीने तक टेंट लगाए रखे और सरकार ने कोई ठोस निर्देश नहीं दिए। गलवान में 20 जवानों की शहादत का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
बीजेपी और आरएसएस पर हमला
ओवैसी ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस का राष्ट्रवाद और देशभक्ति सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी दबाव में काम कर रही है और चीन इसका फायदा उठा रहा है। उनके अनुसार, यह नीति न केवल उद्योग और किसानों के लिए हानिकारक है बल्कि सशस्त्र बलों के मनोबल को भी प्रभावित कर सकती है।
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