West Bengal Results 2026: भवानीपुर में हाई-वोल्टेज मुकाबला, ममता बनाम सुवेंदु की सीधी टक्कर

भवानीपुर विधानसभा सीट पर 2026 के चुनाव में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर ने पूरे बंगाल को सस्पेंस में डाल दिया है, लगातार बदलते मतगणना रुझान, बढ़त और पीछे होने की स्थिति के बीच क्या मुख्यमंत्री अपनी सीट बचा पाएंगी या बड़ा राजनीतिक उलटफेर होगा

भवानीपुर में हाई-वोल्टेज मुकाबला

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 4, 2026

West Bengal Results 2026: पश्चिम बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट एक बार फिर पूरे देश में सुर्खियों में है। यह सीट इसलिए बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि यहां से राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी खुद चुनावी मैदान में हैं। उनके सामने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी मैदान में हैं। दोनों ही नेता राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं, और इसलिए यह मुकाबला केवल एक सीट तक सीमित नहीं बल्कि प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बन चुका है।

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मतगणना में लगातार बदलते रुझान

भवानीपुर सीट पर मतगणना के दौरान बेहद रोमांचक स्थिति देखने को मिल रही है। शुरुआती राउंड में सुवेंदु अधिकारी ने बढ़त बनाई, लेकिन बाद में ममता बनर्जी ने वापसी करते हुए आगे निकलने की स्थिति बनाई। कई राउंड की गिनती के बाद बढ़त बार-बार बदलती रही, जिससे मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि शुरुआती रुझान अंतिम परिणाम की गारंटी नहीं होते, लेकिन इस सीट पर हर वोट की अहमियत बढ़ गई है।

मतदाता सूची और जनसंख्या से जुड़े विवाद

इस बार भवानीपुर में मतदाता सूची से लगभग 41,068 नाम हटाए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया है। इसके चलते कुल मतदाताओं की संख्या में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और यह संख्या करीब 1.6 लाख रह गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘विवादित’ श्रेणी में शामिल मतदाताओं में एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय से है, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये मतदाता मतदान से बाहर रहते हैं, तो टीएमसी की जीत का अंतर काफी कम हो सकता है।

राजनीतिक महत्व और दोनों नेताओं की प्रतिष्ठा

भवानीपुर का यह मुकाबला केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। ममता बनर्जी के लिए यह सीट उनके राजनीतिक गढ़ की तरह है, जहां से जीत उनकी सत्ता और नेतृत्व को और मजबूत करती है। वहीं सुवेंदु अधिकारी के लिए यह अवसर बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि वह मुख्यमंत्री को उनके ही गढ़ में चुनौती देते हैं, तो यह उनकी राजनीतिक छवि को और मजबूत कर सकता है।

2021 के नंदीग्राम चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था, और अब भवानीपुर में यह मुकाबला और भी अधिक संवेदनशील बन गया है।

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भवानीपुर सीट का चुनावी इतिहास

भवानीपुर सीट लंबे समय से ममता बनर्जी का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र मानी जाती रही है। 2011 में उन्होंने यहां उपचुनाव में भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2016 में उनका जीत का अंतर थोड़ा घटा, लेकिन सीट उनके पास ही रही। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने यह सीट फिर से जीती और बाद में उपचुनाव में ममता बनर्जी ने बड़ी जीत दर्ज कर मुख्यमंत्री पद को बनाए रखा। इस इतिहास से साफ है कि भवानीपुर हमेशा टीएमसी का मजबूत किला रहा है, लेकिन बदलते राजनीतिक हालात ने इस बार मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है।

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