West Bengal Election: आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक और कद्दावर नेता हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा सियासी हमला बोला है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य में अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं की पूरी तरह अनदेखी कर रही हैं और अपनी गद्दी बचाने के लिए बहुसंख्यक हिंदुओं के तुष्टिकरण में जुट गई हैं। समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान कबीर ने ममता की नीतियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि ममता बनर्जी सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए मुसलमानों के वोट लेती हैं और लगातार तीन बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद अब वे जगन्नाथ धाम का भव्य निर्माण करा रही हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि राजारहाट इलाके में अल्पसंख्यकों की कीमती जमीन लेकर वहां दुर्गा मंदिर बनवाया जा रहा है।
बाबरी की तर्ज पर मस्जिद बनाने की जिद ने बढ़ाई दूरियां
गौरतलब है कि हुमायूं कबीर किसी समय खुद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक बेहद प्रभावशाली और कद्दावर सिपहसालार हुआ करते थे। लेकिन संवेदनशील मुर्शिदाबाद जिले में विवादित बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक नई मस्जिद के निर्माण के उनके विवादास्पद प्रस्ताव के बाद पार्टी आलाकमान ने कड़ा रुख अपनाया और उन्हें टीएमसी से निष्कासित कर दिया था। सत्ताधारी दल से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद कबीर ने हार नहीं मानी और राज्य में अपनी एक नई स्वतंत्र राजनीतिक जमीन तैयार करने के उद्देश्य से ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) का गठन कर दिया। अब वे आगामी विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी के खिलाफ खुलकर चुनावी बिगुल फूंक चुके हैं।
‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना को सीधी टक्कर
पश्चिम बंगाल की सत्ता से ममता बनर्जी को उखाड़ फेंकने का कड़ा संकल्प दोहराते हुए हुमायूं कबीर ने सूबे की महिला मतदाताओं के लिए एक बहुत बड़ा लोकलुभावन चुनावी दांव खेला है। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार की सबसे लोकप्रिय और गेम चेंजर मानी जाने वाली ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना पर सीधा प्रहार किया। कबीर ने कहा कि टीएमसी सरकार इस योजना के तहत महिलाओं को केवल ₹1,500 की मामूली आर्थिक सहायता दे रही है। उन्होंने एलान किया कि अगर उनकी पार्टी और गठबंधन की सरकार बनती है, तो वे राज्य की माताओं-बहनों को सीधे ₹3,500 प्रति माह का बड़ा वित्तीय भत्ता प्रदान करेंगे।
ओवैसी का ऐतिहासिक गठबंधन
पश्चिम बंगाल के इस हाई-वोल्टेज चुनावी दंगल में सबसे बड़ा सियासी उलटफेर तब देखने को मिला जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया। कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ओवैसी ने साफ किया कि उनके इस चुनावी समझौते का एकमात्र प्राथमिक और सर्वोच्च उद्देश्य राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक सशक्त और स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व खड़ा करना है। ओवैसी ने सरकारी आंकड़ों और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कड़े लहजे में कहा कि जिन राज्यों में अल्पसंख्यकों के पास अपना खुद का मजबूत नेतृत्व नहीं है, वहां उनका सामाजिक, आर्थिक और मानव विकास सूचकांक सबसे ज्यादा निचले स्तर पर है।










