Bengal Election 2026: भवानीपुर में ममता बनाम सुवेंदु, लेफ्ट ने भी उतारे अपने दिग्गज उम्मीदवार

पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव का बिगुल बज चुका है। भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के आमने-सामने होने से मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। उधर, लेफ्ट ने अपने दिग्गज को उतारकर समीकरण उलझा दिए हैं। क्या शुभेंदु इतिहास दोहराएंगे या ममता अपने गढ़ में करेंगी क्लीन स्वीप?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 20, 2026

Bengal Election 2026:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों के औपचारिक ऐलान के बाद राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल—तृणमूल कांग्रेस (TMC), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और लेफ्ट फ्रंट—अपने-अपने किलों को मजबूत करने के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करने में जुट गए हैं। जहाँ टीएमसी ने अपनी पूरी सूची पहले ही जारी कर दी थी, वहीं भाजपा ने अब अपनी दूसरी सूची सार्वजनिक की है। इस बीच, वामपंथी दलों (Left Front) ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए दूसरे चरण के उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, जिससे चुनावी मुकाबला अब त्रिकोणीय होता दिख रहा है।

लेफ्ट फ्रंट का मास्टरप्लान: दूसरे फेज के लिए 32 नामों का ऐलान

वाम मोर्चा ने गुरुवार को दूसरे चरण के मतदान के लिए रणनीतिक रूप से 32 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। इससे पहले, पहले चरण के लिए लेफ्ट फ्रंट ने 192 सीटों पर अपने योद्धाओं के नाम घोषित किए थे। वामपंथी गठबंधन में शामिल CPIML लिबरेशन ने भी अलग से 10 सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों की पुष्टि की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लेफ्ट इस बार युवाओं और अनुभवी चेहरों के मिश्रण के साथ मैदान में उतरा है, ताकि वह टीएमसी और भाजपा के ध्रुवीकरण वाले विमर्श के बीच अपनी जगह बना सके।

भवानीपुर में त्रिकोणीय मुकाबला: ममता बनर्जी और सुवेंदु आमने-सामने

इस बार के चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा भवानीपुर विधानसभा सीट की हो रही है, जो राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में से एक मानी जाती है। यहाँ एक तरफ तृणमूल कांग्रेस की कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ रही हैं, तो वहीं भाजपा ने उनके पूर्व सहयोगी और अब कट्टर प्रतिद्वंद्वी सुवेंदु अधिकारी को उनके खिलाफ मैदान में उतारकर मुकाबले को बेहद निजी और कड़ा बना दिया है। भवानीपुर की इस जंग को ‘सत्ता की प्रतिष्ठा’ की लड़ाई माना जा रहा है, जहाँ दोनों ही नेता अपनी पूरी ताकत झोंकने को तैयार हैं।

लेफ्ट का दांव: श्रीजीब बिस्वास देंगे दिग्गजों को टक्कर

भवानीपुर में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच लेफ्ट फ्रंट ने भी अपना पत्ता खोल दिया है। वाम मोर्चे ने युवा और जुझारू नेता श्रीजीब बिस्वास को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है। लेफ्ट का तर्क है कि जहाँ टीएमसी और भाजपा केवल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त हैं, वहीं उनके उम्मीदवार जनता के बुनियादी मुद्दों जैसे रोजगार और शिक्षा को लेकर मैदान में उतरेंगे। श्रीजीब बिस्वास की उम्मीदवारी ने इस सीट पर समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है, क्योंकि वे भाजपा और टीएमसी दोनों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।

नंदीग्राम और टॉलीगंज में भी कड़ा मुकाबला: शांति गिरी और पार्थ प्रतिम मैदान में

लेफ्ट फ्रंट ने केवल भवानीपुर ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर भी दमदार उम्मीदवारों को उतारा है। भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में चुनौती देने के लिए नंदीग्राम सीट से शांति गिरी को उम्मीदवार बनाया गया है। नंदीग्राम वही भूमि है जहाँ से बंगाल की राजनीति में बड़ा परिवर्तन आया था। वहीं, दक्षिण कोलकाता की महत्वपूर्ण टॉलीगंज सीट से पार्थ प्रतिम बिस्वास को चुनाव मैदान में उतारा गया है। टॉलीगंज में मुकाबला ग्लैमर और जमीनी राजनीति के बीच होने की उम्मीद है, जहाँ वामपंथियों की साख दांव पर लगी है।

2026 के रण में किसकी होगी जीत?

पश्चिम बंगाल का यह विधानसभा चुनाव न केवल राज्य के भविष्य के लिए बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उम्मीदवारों के चयन से यह साफ है कि कोई भी दल किसी भी सीट को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है। भवानीपुर से लेकर नंदीग्राम तक, हर सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। अब गेंद बंगाल की जनता के पाले में है, जो तय करेगी कि क्या ममता बनर्जी की ‘हैट्रिक’ लगेगी, या भाजपा का ‘आसोल पोरिवोर्तन’ (असली बदलाव) सफल होगा, या फिर लेफ्ट फ्रंट अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने में कामयाब होगा।

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