Bengal Bakrid Rules : बंगाल में शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला,अब खुले में नहीं दी जा सकेगी कुर्बानी, बकरीद पर सख्त नियम

पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित शुभेंदु अधिकारी सरकार ने बकरीद को लेकर एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अब राज्य में सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी देना कानूनी अपराध होगा। प्रशासन ने केवल चिन्हित स्थानों और बूचड़खानों में ही इसकी अनुमति दी है। क्या इस फैसले से राज्य का सियासी पारा चढ़ेगा?

Bengal Bakrid Rules

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 14, 2026

Bengal Bakrid Rules : पश्चिम बंगाल की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था को बदलने के लिए ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। शुभेंदु सरकार अब पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में नजर आ रही है। सत्ता संभालने के कुछ ही समय के भीतर उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक अनुशासन को लेकर कई कड़े निर्देश जारी किए हैं। उनके हालिया फैसलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नई सरकार अवैध गतिविधियों और सार्वजनिक असुविधा पैदा करने वाले कारकों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। कोयला और रेत खनन के साथ-साथ अब सरकार ने धार्मिक स्थलों और पशु संरक्षण पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।

पशु वध पर सख्त नियंत्रण: अब बिना सर्टिफिकेट नहीं होगी हत्या

राज्य सरकार ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ को तत्काल प्रभाव से सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है। इस नए निर्देश के बाद अब बंगाल में कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से गाय, बैल, बछड़े या भैंस जैसे पशुओं का वध नहीं कर सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पशु को मारने से पहले एक आधिकारिक ‘उपयुक्तता प्रमाण पत्र’ प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह आदेश उन सभी मवेशियों पर लागू होगा जिन्हें अब तक बिना किसी विधिक प्रक्रिया के काटा जा रहा था। इस कदम को राज्य में पशु तस्करी रोकने और पशुधन के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

प्रमाण पत्र के लिए कड़ी शर्तें: 14 साल की आयु और चिकित्सा आधार अनिवार्य

पशु वध के लिए सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सख्त बनाया गया है। अब नगरपालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के सभापति के साथ एक सरकारी पशु चिकित्सक को संयुक्त रूप से यह प्रमाणित करना होगा कि पशु वध के लिए उपयुक्त है। यह सर्टिफिकेट केवल तभी जारी किया जाएगा जब पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का हो, स्थायी रूप से अक्षम हो, किसी असाध्य रोग से ग्रसित हो या गंभीर चोट के कारण काम करने की स्थिति में न हो। यदि प्रशासन सर्टिफिकेट देने से इनकार करता है, तो संबंधित व्यक्ति 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है।

खुले स्थानों पर वध वर्जित: नियमों के उल्लंघन पर होगी जेल

शुभेंदु सरकार ने सार्वजनिक स्वच्छता और धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए खुले में पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश के मुताबिक, जिन पशुओं के लिए सर्टिफिकेट जारी किया गया है, उनका वध भी केवल सरकारी वधगृहों (slaughterhouses) या प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही किया जा सकेगा। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। अधिनियम के उल्लंघन पर 6 महीने की जेल या आर्थिक जुर्माने की सजा दी जाएगी। साथ ही, सरकारी अधिकारियों को किसी भी परिसर का निरीक्षण करने का अधिकार दिया गया है, जिसका विरोध करना कानूनी अपराध माना जाएगा।

धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर का शोर नियंत्रित: सड़कों पर प्रार्थना पर रोक

योगी आदित्यनाथ के प्रशासनिक मॉडल की तर्ज पर चलते हुए शुभेंदु अधिकारी ने धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज को नियंत्रित करने का फरमान सुनाया है। पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि लाउडस्पीकर की ध्वनि परिसर से बाहर न जाए। इसके अलावा, सड़कों पर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियों या प्रार्थना सभाओं के कारण लगने वाले जाम को रोकने के आदेश दिए गए हैं, ताकि आम जनता को आवाजाही में परेशानी न हो। हालांकि, विशेष अवसरों पर कुछ रियायतें दी जा सकती हैं, लेकिन सामान्य दिनों में नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

जीरो टॉलरेंस की नीति: अवैध खनन और तस्करी पर प्रहार

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केवल धार्मिक और सामाजिक सुधारों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में वर्षों से फल-फूल रहे अवैध कोयला और रेत खनन सिंडिकेट की कमर तोड़ने के निर्देश भी दिए हैं। पशु तस्करी और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इन फैसलों से यह संकेत मिलता है कि बंगाल में अब एक नई कार्य संस्कृति विकसित करने की कोशिश की जा रही है, जहां कानून का शासन सर्वोपरि होगा।

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