UP Fire Accident : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जैदपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर में रविवार की दोपहर अचानक भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस भयावह अग्निकांड में परिसर के भीतर खड़ी 13 एंबुलेंस जलकर पूरी तरह से कंकाल में तब्दील हो गईं। गनीमत यह रही कि राहत बचाव कार्य समय पर शुरू होने से लगभग 30 अन्य एंबुलेंस को सुरक्षित बचा लिया गया, वरना यह क्षति और भी बड़ी हो सकती थी।
दोपहर 3 बजे का मंजर: धुएं के गुबार से ढका आसमान
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हादसा रविवार दोपहर करीब 3:00 बजे पेश आया। जैदपुर सीएचसी परिसर के पिछले हिस्से में, जहां एंबुलेंस खड़ी की जाती हैं, वहां से अचानक काला धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में वहां मौजूद कर्मचारियों ने इसे सामान्य कूड़ा जलने की घटना समझा, लेकिन तेज हवाओं के कारण चंद मिनटों में ही चिंगारी ने शोले का रूप ले लिया। आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर से ही धुएं का गुबार देखा जा सकता था। अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों में इस मंजर को देखकर दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
पुरानी एंबुलेंस का डिपो और लापरवाही का सवाल
शुरुआती जांच और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीएचसी परिसर में पिछले काफी समय से 40 से अधिक पुरानी और निष्प्रयोज्य (कबाड़) एंबुलेंस खड़ी थीं। बताया जा रहा है कि इन एंबुलेंसों के स्क्रैप यानी नीलाम करने की प्रक्रिया चल रही थी। लंबे समय से एक ही जगह पर घास-फूस के बीच खड़ी इन गाड़ियों में शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य बाहरी चिंगारी से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही को भी हादसे की एक बड़ी वजह माना जा रहा है, क्योंकि ज्वलनशील पदार्थ वाली गाड़ियों को इस तरह असुरक्षित छोड़ना खतरनाक साबित हुआ।
पुलिस का साहस: ट्रैक्टर से खींचकर बचाई गईं 30 एंबुलेंस
हादसे की सूचना मिलते ही जैदपुर थाना प्रभारी संतोष कुमार सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। उस समय आग तेजी से एक गाड़ी से दूसरी गाड़ी में फैल रही थी। पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए स्थानीय लोगों की मदद ली और मौके पर मौजूद ट्रैक्टर व अन्य साधनों का उपयोग किया। आग की लपटों के बीच फंसी करीब 30 एंबुलेंस को खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पुलिस की इस तत्परता ने करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति को स्वाहा होने से बचा लिया। स्थानीय युवाओं ने भी इस बचाव कार्य में पुलिस का भरपूर सहयोग किया।
दमकल विभाग की मशक्कत और मलबे में तब्दील वाहन
आग की भयावहता को देखते हुए दमकल विभाग की कई गाड़ियों को मौके पर बुलाया गया। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत और घंटों की घेराबंदी के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। हालांकि, जब तक आग बुझाई गई, तब तक 13 एंबुलेंस पूरी तरह जल चुकी थीं और मौके पर सिर्फ उनके लोहे के ढांचे ही बचे थे। राहत की बात यह रही कि फायर फाइटर्स ने आग को अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग, ऑक्सीजन प्लांट और वार्डों तक पहुंचने से रोक दिया, जिससे अस्पताल के भीतर भर्ती मरीजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
जांच के घेरे में हादसा: कारणों की तलाश शुरू
वर्तमान में जैदपुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम आग लगने के सटीक कारणों की पड़ताल कर रही है। विभाग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे किसी की शरारत या बड़ी तकनीकी लापरवाही थी। जैदपुर थाना प्रभारी ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और जल्द ही रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों के परिसर में खड़े कबाड़ वाहनों के प्रबंधन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Read more : तीन महीने बाद गंगा की लहरों पर लौटा रो-पैक्स क्रूज अब 250 रुपये में उठाएं सफर का लुत्फ









