Anti-Paper Leak Bill: “UPA शासन में 22 बार लीक हुए थे पेपर…” लोकसभा में बांसुरी स्वराज के इन विस्फोटक आंकड़ों से मचा राजनीतिक भूचाल

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार के कदम का समर्थन किया। उन्होंने विपक्ष पर 'सेलेक्टिव आउटरेज' का आरोप लगाते हुए कहा कि 2014 से पहले यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी कई बार पेपर लीक हुए थे। उन्होंने पंजाब के मुद्दे पर भी विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया।

Anti-Paper Leak Bill

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 28, 2026

Anti-Paper Leak Bill: संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में नीट (NEET) परीक्षा समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और धांधली के गंभीर मुद्दों पर चल रही गरमागरम बहस के बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार का पुरजोर समर्थन किया है। सदन को संबोधित करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि यह नया संशोधन विधेयक (एंटी पेपर लीक बिल) एक बेहद क्रांतिकारी और बदलाव लाने वाला कदम है, जिसकी आज के समय में न सिर्फ अत्यधिक आवश्यकता थी, बल्कि यह देश के छात्र-युवाओं की बहुत बड़ी मांग भी थी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कड़े कानून को संसद में लाया जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवाओं के भविष्य को लेकर कितने संवेदनशील और जवाबदेह हैं। बांसुरी स्वराज ने कहा कि पीएम मोदी द्वारा यह कहा जाना कि पेपर लीक एक ‘घोर अपराध’ है, केवल एक जुबानी बयान नहीं है, बल्कि यह उनकी सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीयत को दर्शाता है।

“विपक्ष केवल चुनिंदा मुद्दों पर दिखा रहा है पक्षपाती विरोध”

विपक्षी दलों पर आक्रामक रुख अपनाते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सदन में तीखा हमला बोला और कहा कि विपक्ष इस संवेदनशील विषय पर केवल ‘सेलेक्टिव आउटरेज’ यानी चुनिंदा और पक्षपाती विरोध की राजनीति कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह लड़ाई किसी सिद्धांत पर आधारित है, तो सरकार बदलते ही विपक्ष का नजरिया और रुख क्यों बदल जाता है?

उन्होंने विपक्षी दलों को घेरते हुए पंजाब का विशेष उदाहरण दिया और पूछा कि आखिर विपक्षी पार्टियां पंजाब में हाल ही में हुए पेपर लीक मामलों और वहां के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग क्यों नहीं कर रही हैं? उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य विरोधी दल देश भर में एक मनगढ़ंत नैरेटिव तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं कि पेपर लीक की समस्या केवल साल 2014 के बाद ही पैदा हुई है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है।

“मोदी सरकार सत्ता में आने से पहले UPA शासन के एक दशक में भी दर्ज हुए थे कई लीक”

अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले, जब देश में एक दशक तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) सरकार थी, तब भी कई बार परीक्षाओं के पर्चे लीक हुए थे। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए सदन में कहा कि उस दौर में केंद्र और विभिन्न राज्यों में कई बार ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें से कई मामले सीधे केंद्र सरकार के अधीन आने वाली महत्वपूर्ण परीक्षाओं से जुड़े हुए थे।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर इस राष्ट्रीय समस्या के समाधान के लिए गंभीर होना चाहिए। बांसुरी स्वराज ने सदन को आश्वस्त किया कि वर्तमान केंद्र सरकार देश की शिक्षण और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से सुरक्षित, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, और यह नया संशोधन बिल इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम साबित होगा।