Bangladesh Violence: अवामी लीग के दो दिग्गज नेताओं की हत्या से दहला बांग्लादेश, सड़कों पर उतरी सेना, बढ़ा तनाव

बांग्लादेश में 12 फरवरी के चुनावों से पहले अवामी लीग के दो कद्दावर नेताओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। इस घटना के बाद पूरे ढाका में तनाव फैल गया है और अंतरिम सरकार ने शांति बनाए रखने के लिए सेना को 'मैजिस्टेरियल पावर' के साथ सड़कों पर उतार दिया है। क्या यह एक बड़ी राजनीतिक साजिश है?

Bangladesh Violence

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 2, 2026

Bangladesh Violence:  पड़ोसी देश बांग्लादेश से हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता की भयावह खबरें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी, अवामी लीग से जुड़े दो प्रमुख नेताओं की अलग-अलग जिलों में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इनमें से एक वरिष्ठ नेता की मौत जेल में न्यायिक हिरासत के दौरान हुई, जबकि एक अन्य छात्र नेता की कथित तौर पर अपहरण के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई। इन घटनाओं ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि देश में अवामी लीग के समर्थकों के खिलाफ लक्षित हिंसा और राजनीतिक दमन का दौर चरम पर है।

चटगांव जेल में वरिष्ठ नेता अब्दुर रहमान मिया का निधन: इलाज में लापरवाही का आरोप

चटगांव से आई खबर के अनुसार, अवामी लीग की वार्ड इकाई के 70 वर्षीय उपाध्यक्ष अब्दुर रहमान मिया की जेल में मौत हो गई। मिया फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। परिजनों का आरोप है कि 17 नवंबर 2025 को जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब वे चलने की स्थिति में भी नहीं थे। उन पर विस्फोटक अधिनियम के तहत संदिग्ध आरोप लगाए गए थे। परिवार का दावा है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें जमानत नहीं दी गई और न ही जेल के भीतर समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। उनकी मृत्यु को अवामी लीग ने ‘हिरासत में की गई हत्या’ करार दिया है।

नरसिंदी में छात्र नेता की नृशंस हत्या: खाई में मिला क्षत-विक्षत शव

दूसरी दिल दहला देने वाली घटना नरसिंदी जिले की है। यहाँ छत्र लीग (अवामी लीग की छात्र इकाई) के पूर्व नेता अजीमुल कादेर भुइयां का शव एक सुनसान खाई से बरामद किया गया है। 45 वर्षीय अजीमुल पिछले तीन दिनों से लापता थे। वे पेशे से एक पोल्ट्री व्यवसायी थे और जमीन स्तर पर पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता माने जाते थे। उनका शव मिलने के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट रूप से अपहरण के बाद की गई हत्या का मामला प्रतीत हो रहा है।

जमात-ए-इस्लामी पर संदेह: अवामी लीग ने लगाया साजिश का आरोप

अजीमुल की हत्या के बाद अवामी लीग ने सीधे तौर पर ‘जमात-ए-इस्लामी’ के कार्यकर्ताओं पर उंगली उठाई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रशासन और कट्टरपंथी ताकतें मिलकर उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही हैं। अवामी लीग के अनुसार, अजीमुल कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा नहीं थे, फिर भी उनकी हत्या केवल विचारधारा के कारण की गई। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। हालांकि, स्थानीय लोगों और समर्थकों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है, जिससे गृहयुद्ध जैसी स्थिति की आशंका जताई जा रही है।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता: क्या बांग्लादेश में लोकतंत्र खतरे में है?

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में अवामी लीग के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मनमानी गिरफ्तारी और लक्षित हमलों की बाढ़ आ गई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इन हालिया मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मोहम्मद यूनुस की सरकार से मांग की है कि दोनों मामलों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने इस तरह की हिंसा पर अंकुश नहीं लगाया, तो देश में कानून का शासन (Rule of Law) पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की छवि धूमिल होगी।

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