Bangladesh Crisis: पीएम तारिक रहमान को 9 वैश्विक संगठनों की चिट्ठी, प्रेस की आजादी पर जताई गहरी चिंता!

बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान को CPJ और ह्यूमन राइट्स वॉच सहित 9 वैश्विक संगठनों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर प्रेस स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया है। क्या नई सरकार पत्रकारों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेगी या बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की आजादी का संकट और गहराएगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 19, 2026

Bangladesh Crisis: बांग्लादेश में प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की लगातार गिरती स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है। हाल ही में ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (CPJ) सहित नौ प्रमुख वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को एक अत्यंत महत्वपूर्ण संयुक्त पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से सरकार से आग्रह किया गया है कि पत्रकारों के खिलाफ दर्ज किए गए प्रतिशोधात्मक मामलों की तत्काल समीक्षा की जाए। संगठनों का मानना है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए मीडिया की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर मंडरा रहे खतरों को दूर करना अब अनिवार्य हो गया है।

अभिव्यक्ति की आजादी पर गहराता संकट और रिहाई की मांग

संयुक्त पत्र में मानवाधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री से मीडिया की स्वतंत्रता को राष्ट्रीय प्राथमिकता देने और हिरासत में लिए गए पत्रकारों को बिना किसी देरी के रिहा करने का पुरजोर आग्रह किया है। संगठनों ने मांग की है कि ‘डिजिटल सुरक्षा अधिनियम’ और ‘साइबर सुरक्षा अधिनियम’ जैसे कठोर और दमनकारी कानूनों के तहत पत्रकारों पर दर्ज मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए। इन कदमों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप प्रेस की स्वतंत्रता बहाल करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ बताया जा रहा है।

कट्टरपंथी समूहों की धमकियां और सुरक्षा की चुनौती

पत्र में इस बात की भी गंभीर चेतावनी दी गई है कि बांग्लादेश में वर्तमान में पत्रकार, संगीतकार और कलाकार कट्टरपंथी समूहों और हिंसक भीड़ के निशाने पर हैं। उन्हें लगातार धमकियों और शारीरिक हमलों का सामना करना पड़ रहा है। संगठनों ने सरकार से कानून के दुरुपयोग को रोकने और कलाकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। इसके अतिरिक्त, इंटरनेट शटडाउन (Internet Shutdown) और मनमानी सेंसरशिप जैसी प्रथाओं को समाप्त कर सूचना के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

प्रमुख मीडिया संस्थानों पर हमलों की निष्पक्ष जांच

वैश्विक संगठनों ने दिसंबर 2025 के दौरान ‘प्रथम आलो’ और ‘डेली स्टार’ जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों पर हुए सुनियोजित हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया है कि इन हमलों की त्वरित और निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग’ का गठन किया जाए। यह आयोग न केवल मीडिया कर्मियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की जांच करेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में भी कार्य करेगा।

मानवाधिकारों का उल्लंघन और भीड़ हिंसा का बढ़ता ग्राफ

रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान बड़े पैमाने पर हुई मनमानी गिरफ्तारियों ने देश में भय का माहौल पैदा कर दिया है। बढ़ती हुई भीड़ हिंसा ने न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों, महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा को भी गंभीर संकट में डाल दिया है। विशेष रूप से चटगांव जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही मारपीट और यातना की घटनाओं ने मानवाधिकारों की स्थिति को बेहद चिंताजनक बना दिया है।

पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए व्यवस्थागत सुधार की आवश्यकता

अंत में, मानवाधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से आग्रह किया है कि वे अपने कार्यकाल का उपयोग शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए करें। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यदि सरकार इन व्यवस्थागत सुधारों को लागू करती है, तो यह बांग्लादेश में लोकतंत्र की मजबूती और मानवाधिकारों के संरक्षण की एक सकारात्मक विरासत स्थापित करेगा। सरकार को सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को धरातल पर साबित करने की जरूरत है।

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