Bangladesh New PM: तारिक रहमान बने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने दिलाई शपथ

17 फरवरी 2026 को बांग्लादेश ने एक नया इतिहास रचा। 17 साल के निर्वासन के बाद लौटे तारिक रहमान ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। क्या बीएनपी की यह प्रचंड जीत भारत के साथ रिश्तों में नया मोड़ लाएगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 17, 2026

Bangladesh New PM:  बांग्लादेश की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। तारिक रहमान ने आधिकारिक तौर पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। यह पल देश के इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी पुरुष नेता ने प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली है। इससे पहले दशकों तक बांग्लादेश की सत्ता की धुरी बेगम खालिदा जिया और शेख हसीना जैसी महिला नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही थी। तारिक रहमान के सत्ता संभालने के साथ ही देश में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत मानी जा रही है।

संसद के साउथ प्लाजा में आयोजित हुआ भव्य शपथ ग्रहण समारोह

शपथ ग्रहण का मुख्य कार्यक्रम राजधानी ढाका स्थित राष्ट्रीय संसद के साउथ प्लाजा में आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक समारोह में विभिन्न देशों के राजनयिक, सेना के आला अधिकारी और जाने-माने गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने तारिक रहमान को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। ढाका की सड़कों पर समर्थकों का भारी हुजूम देखने को मिला, जो अपने नए नेता के स्वागत के लिए सुबह से ही जमा थे।

एनसीपी सांसदों का कड़ा विरोध और सियासी हंगामा

जहाँ एक तरफ तारिक रहमान के समर्थक जश्न मना रहे थे, वहीं दूसरी ओर संसद के भीतर और बाहर भारी विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला। एनसीपी (NCP) के सांसदों ने इस शपथ ग्रहण समारोह का कड़ा विरोध किया। विपक्षी दल के नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए समारोह का बहिष्कार किया और लोकतंत्र की दुहाई दी। विपक्षी खेमे का आरोप है कि यह सत्ता हस्तांतरण संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर किया गया है। संसद परिसर में विपक्षी सांसदों और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

बांग्लादेश में पुरुष प्रधानमंत्री: 30 साल बाद बदला ट्रेंड

बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह एक दुर्लभ अवसर है। पिछले तीन दशकों से देश की राजनीति “दो बेगमों की लड़ाई” के नाम से जानी जाती थी। 1990 के दशक के बाद से लगातार महिला नेतृत्व ने ही देश का मार्गदर्शन किया। तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना न केवल लैंगिक आधार पर एक बदलाव है, बल्कि यह देश की भविष्य की नीतियों में भी बड़े बदलाव का संकेत देता है। विश्लेषकों का मानना है कि तारिक के सामने आर्थिक स्थिरता और आंतरिक सुरक्षा जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

तारिक रहमान के सामने चुनौतियां और भविष्य का रोडमैप

प्रधानमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद तारिक रहमान ने देश को संबोधित करते हुए अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। हालांकि, विपक्ष का कड़ा प्रतिरोध उनके शासन के लिए एक बड़ी बाधा बन सकता है। देश के भीतर महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर युवाओं की उम्मीदें अब नए प्रधानमंत्री से टिकी हैं। उन्हें न केवल अपनी पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखना होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश की छवि को मजबूत करना होगा।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक समीकरण

तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने पर पड़ोसी देशों और वैश्विक महाशक्तियों की नजरें टिकी हुई हैं। भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों के साथ बांग्लादेश के संबंधों में अब क्या बदलाव आएगा, यह देखने वाली बात होगी। जानकारों का कहना है कि तारिक रहमान की छवि एक कट्टर राष्ट्रवादी नेता की रही है, ऐसे में वे क्षेत्रीय कूटनीति को किस दिशा में ले जाते हैं, यह दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

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