Bangladesh Election 2026: अवामी लीग के बिना तारिक रहमान का शक्ति प्रदर्शन, क्या BNP बनाएगी सरकार?

12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले तारिक रहमान ने ढाका में लाखों समर्थकों के साथ अपनी ताकत दिखाई है। अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद बीएनपी को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, लेकिन क्या युवाओं और कट्टरपंथी ताकतों का नया समीकरण तारिक रहमान के सपनों को हकीकत में बदलने देगा?

Bangladesh Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 9, 2026

Bangladesh Election 2026: पड़ोसी देश बांग्लादेश में लोकतंत्र की नई इबारत लिखने की तैयारी हो रही है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों के लिए देश का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। लंबे समय तक शेख हसीना की ‘अवामी लीग’ और खालिदा जिया की ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP)’ के इर्द-गिर्द घूमने वाली बांग्लादेश की राजनीति इस बार एक ऐतिहासिक मोड़ पर है। अवामी लीग पर प्रतिबंध लगने के बाद यह चुनाव मुख्य रूप से BNP के इर्द-गिर्द सिमट गया है। इस बार पार्टी की कमान दिवंगत खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथों में है। यह चुनाव न केवल देश का भविष्य तय करेगा, बल्कि तारिक रहमान के राजनीतिक वजूद के लिए भी एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है।

BNP की स्थिति: दबाव और संघर्षों के बीच वापसी की कोशिश

जियाउर रहमान द्वारा स्थापित ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ कभी देश की सबसे ताकतवर सियासी ताकत हुआ करती थी। हालांकि, पिछले एक दशक में इस पार्टी ने भीषण राजनीतिक दमन, कानूनी पेचीदगियों और संगठनात्मक बिखराव का सामना किया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी के सामने नेतृत्व का एक बड़ा शून्य पैदा हो गया था। अब तारिक रहमान इस खालीपन को भरने की कोशिश कर रहे हैं। यद्यपि अवामी लीग की अनुपस्थिति में BNP की राह आसान नजर आती है, लेकिन चुनाव की निष्पक्षता और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच पार्टी को अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी।

कौन हैं तारिक रहमान? विवादों और उम्मीदों के बीच फंसा सियासी सफर

तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के वारिस हैं। उन्हें BNP के भीतर एक रणनीतिकार और आधुनिक सुधारवादी नेता के रूप में देखा जाता है। उन्होंने पार्टी के भीतर युवाओं को तरजीह दी है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क मजबूत किया है। हालांकि, उनका अतीत विवादों से मुक्त नहीं रहा। भ्रष्टाचार के आरोप और कई वर्षों तक देश से बाहर रहने के कारण विरोधियों ने उन्हें हमेशा निशाना बनाया है। BNP का कहना है कि ये सभी मामले राजनीतिक द्वेष का हिस्सा थे, जबकि तारिक की रैलियों में उमड़ रही युवाओं की भीड़ उनके प्रति बढ़ते भरोसे की ओर इशारा कर रही है।

लोकतंत्र की बहाली का नारा: तारिक रहमान की चुनावी रणनीति

अपनी चुनावी सभाओं में तारिक रहमान ने खुद को एक ‘लोकतंत्र समर्थक’ नेता के रूप में पेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, बल्कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को फिर से स्थापित करना है। उनके भाषणों में एक स्वतंत्र चुनाव आयोग, प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के शासन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। रहमान की रणनीति युवाओं को यह विश्वास दिलाने की है कि BNP के शासन में ही बांग्लादेश का विकास सुरक्षित है।

विदेशी नीति और ‘बांग्लादेश फर्स्ट’: आर्थिक विकास का नया रोडमैप

तारिक रहमान ने एक नई विदेश नीति का खाका पेश करते हुए ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ का नारा दिया है। उन्होंने हाल ही में कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो अर्थव्यवस्था पर आधारित विदेश नीति अपनाई जाएगी। रहमान के अनुसार, विदेशी संबंधों में आपसी विश्वास, सम्मान और पारस्परिक लाभ को प्राथमिकता दी जाएगी। वह बांग्लादेश को एक वैश्विक आर्थिक खिलाड़ी के रूप में पेश करना चाहते हैं। हालांकि, कट्टरपंथी ताकतों का उदय और देश के आंतरिक सुरक्षा हालात उनके इस सपने के सामने बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

नेतृत्व की चुनौती: संगठन को एकजुट रखना सबसे बड़ा लक्ष्य

तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी बाधा संगठन के भीतर एकता बनाए रखना है। हालांकि वह पार्टी के एकमात्र प्रभावी केंद्रीय चेहरे हैं, लेकिन उनकी कानूनी उलझने अभी खत्म नहीं हुई हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरपंथी विचारधारा देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा सकती है, जो तारिक के लोकतांत्रिक वादों के लिए खतरा है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 12 फरवरी के नतीजे तारिक रहमान को एक सफल राजनेता के रूप में स्थापित करते हैं या बांग्लादेश की राजनीति किसी नए संकट की ओर मुड़ जाती है।

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