Bangladesh Election 2026: पड़ोसी देश बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनावों से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। देशभर में जारी राजनीतिक हिंसा ने आम नागरिकों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान चुनावी अशांति की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि राजनीतिक दलों के बीच यह टकराव तुरंत नहीं रुका, तो देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भारी नुकसान पहुँच सकता है। वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियां भारी दबाव में हैं और स्थिति गृहयुद्ध जैसी नजर आ रही है।
जनवरी में हिंसा के आंकड़ों में चार गुना उछाल
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ‘आइन ओ सालिश केंद्र’ (ASK) की हालिया रिपोर्ट ने देश की बिगड़ती कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 के मात्र एक महीने में राजनीतिक हिंसा की 75 बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 11 लोगों की जान चली गई और 616 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। दिसंबर 2025 की तुलना में हिंसा के मामलों में चार गुना वृद्धि हुई है। दिसंबर में केवल 18 घटनाएं हुई थीं, जो यह दर्शाती हैं कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख (12 फरवरी) नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे आपसी रंजिश और हिंसक झड़पें तेज होती जा रही हैं।
चुनाव घोषणा के बाद बेकाबू हुई स्थिति
22 जनवरी को चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा करने के बाद से उपद्रव और अधिक बढ़ गया है। ASK की रिपोर्ट बताती है कि 21 से 31 जनवरी के बीच ही 49 अलग-अलग हिंसक मुठभेड़ें हुईं। इन 10 दिनों के भीतर ही 4 लोगों की मौत और 414 लोगों के घायल होने की खबर है। हिंसा का असर अब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया पर भी पड़ रहा है। जनवरी में पत्रकारों पर हमले और उनके काम में बाधा डालने की 16 घटनाएं सामने आईं, जिससे प्रेस की आजादी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बुनियादी ढांचे और मतदान केंद्रों पर हमला
हिंसा का यह दौर केवल रैलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब उपद्रवी सार्वजनिक और चुनावी बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। कई निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के चुनावी कार्यालयों, प्रचार वाहनों और निजी संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई है। यहाँ तक कि मतदान केंद्रों पर निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे तक लूट लिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों से लगातार गोलीबारी, चाकूबाजी और बमबारी की खबरें आ रही हैं, जिससे मतदाताओं के मन में पोलिंग बूथ तक जाने को लेकर संशय पैदा हो गया है।
सत्ता का संघर्ष: पूर्व सहयोगियों के बीच रार
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जो दल पहले शेख हसीना की सरकार को हटाने के लिए एकजुट थे, वे अब सत्ता की कुर्सी के लिए एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं। मोहम्मद यूनुस के साथ गठबंधन करने वाले ये दल अब भविष्य की सरकार में अपनी हिस्सेदारी पक्की करने के लिए हिंसक रास्ते पर चल पड़े हैं। इसी आपसी सत्ता संघर्ष ने बांग्लादेश को अस्थिरता की आग में झोंक दिया है। मानवाधिकार संगठनों ने सभी दलों से संयम बरतने की अपील की है, ताकि 12 फरवरी को निष्पक्ष मतदान संपन्न कराया जा सके।
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