Bangladesh Election Row: बीएनपी की प्रचंड जीत पर धांधली के आरोप, वायरल वीडियो ने मचाई खलबली; क्या फिर होंगे चुनाव?

बांग्लादेश में तारिक रहमान की जीत के जश्न के बीच धांधली के आरोपों ने कोहराम मचा दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित 'फर्जी वोटिंग' के वीडियो और कई मतदान केंद्रों पर अनियमितताओं की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का ध्यान भी खींचा है। क्या ये जीत वाकई निष्पक्ष है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 13, 2026

Bangladesh Election Row :  बांग्लादेश में 2026 के आम चुनावों के मतदान संपन्न होने के बाद अब परिणामों को लेकर एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। जैसे ही चुनाव आयोग ने प्रारंभिक परिणामों की घोषणा शुरू की, विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने “व्यापक धोखाधड़ी” के आरोप लगाते हुए विरोध का बिगुल फूंक दिया है। राजधानी ढाका के कई प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन आरोपों ने न केवल देश के भीतर तनाव पैदा कर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का ध्यान भी इस “बिल्ली और चूहे के खेल” की ओर आकर्षित किया है, जिससे राजधानी के माहौल में भारी बेचैनी देखी जा रही है।

जमात-ए-इस्लामी और 11-दलीय गठबंधन के तीखे प्रहार

जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन ने आधिकारिक तौर पर कई प्रमुख सीटों पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। गठबंधन के शीर्ष नेताओं का दावा है कि परिणामों के साथ योजनाबद्ध तरीके से छेड़छाड़ की गई है ताकि विशिष्ट उम्मीदवारों को फायदा पहुँचाया जा सके। नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के नेता आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन डिजिटल और मैनुअल आंकड़ों को प्रस्तुत किया, जो आधिकारिक घोषणाओं से मेल नहीं खाते। उनका तर्क है कि जिन सीटों पर विपक्षी उम्मीदवार निर्णायक बढ़त बनाए हुए थे, वहां अंतिम क्षणों में परिणामों को रहस्यमयी तरीके से पलट दिया गया।

ढाका की हॉट सीटों पर संदेह का घेरा: आंकड़ों की बाजीगरी

विवाद का मुख्य केंद्र ढाका-13, ढाका-8, ढाका-16 और ढाका-17 जैसी महत्वपूर्ण सीटें बनी हुई हैं। NCP का दावा है कि ढाका-13 निर्वाचन क्षेत्र में उनके प्रत्याशी भारी मतों से जीत की ओर अग्रसर थे, लेकिन अचानक विरोधी उम्मीदवार की जीत का ऐलान कर दिया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस सीट पर बीएनपी समर्थित उम्मीदवार बॉबी हज्जाज को 90,601 मतों के साथ विजयी घोषित किया गया है। हालांकि, विपक्षी खेमा इन आंकड़ों को फर्जी और मनगढ़ंत बताकर खारिज कर रहा है, जिससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह गहरा गया है।

बैलेट डिजाइन में खामी: हजारों वैध वोट हुए अमान्य

ढाका-13 से जमात समर्थित प्रत्याशी मौलाना ममनूल हक ने मतदान प्रक्रिया की तकनीकी खामियों पर प्रहार किया है। उनका कहना है कि बैलेट पेपर का डिजाइन जानबूझकर भ्रमित करने वाला बनाया गया था, जिसके कारण हजारों अशिक्षित और सामान्य मतदाता सही ढंग से मोहर नहीं लगा सके। हक का दावा है कि करीब 50 मतदान केंद्रों पर लगभग 1,200 वोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया, जबकि पूरे क्षेत्र में यह संख्या 3,000 के पार है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि रद्द किए गए प्रत्येक वोट की दोबारा समीक्षा की जाए ताकि जनता के वास्तविक जनादेश का अपमान न हो।

छात्रों का आंदोलन: नाहिद इस्लाम की ‘लोकतंत्र बचाओ’ अपील

विवाद की आंच अब ढाका-8 सीट तक पहुँच चुकी है, जहाँ बीएनपी के मिर्जा अब्बास को लेकर भारी हंगामा हो रहा है। NCP के संयोजक नाहिद इस्लाम ने सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं और छात्रों को सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। उन्होंने इसे “वोट के अधिकार की रक्षा” की लड़ाई करार दिया है। एनसीपी उम्मीदवार नासिरुद्दीन पटवारी ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जीत की आधिकारिक घोषणा से पहले ही सिस्टम में बदलाव कर दिए गए थे। जमात नेतृत्व का मानना है कि इस तरह की “राजनीतिक चूहे-बिल्ली” की लुका-छिपी देश को गृहयुद्ध जैसी स्थिति की ओर धकेल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और चुनाव आयोग की अग्निपरीक्षा

इन गंभीर आरोपों के बाद बांग्लादेश का चुनाव आयोग भारी दबाव में है। विपक्ष की स्पष्ट मांग है कि जब तक सभी संदिग्ध सीटों पर स्वतंत्र जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक अंतिम परिणाम घोषित न किए जाएं। शेख हसीना, जो पहले ही इन चुनावों को “दिखावा” बता चुकी हैं, उनके दावों को अब इन विवादों से बल मिल रहा है। हालांकि तारिक रहमान जीत की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, लेकिन धांधली के इन आरोपों ने उनके संभावित कार्यकाल की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि आयोग पारदर्शिता सुनिश्चित करता है या देश एक बार फिर अस्थिरता के अंधेरे में खो जाता है।

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