Bangladesh 2026 Holiday: बांग्लादेश में यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान हिंदू समुदाय को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल के महीनों में हिंदुओं पर हमलों और भेदभाव के आरोप सामने आते रहे हैं। अब साल 2026 की सरकारी छुट्टियों की सूची जारी होने के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। नई सूची में कई प्रमुख हिंदू धार्मिक पर्वों को छुट्टियों से बाहर रखा गया है, जिस पर देश के भीतर और बाहर सवाल उठाए जा रहे हैं।
Bangladesh 2026 Holiday: 2026 की छुट्टियों की सूची में क्या बदला
बांग्लादेश सरकार द्वारा जारी 2026 की आधिकारिक छुट्टियों की सूची के अनुसार, सरस्वती पूजा, बुद्ध पूर्णिमा, जन्माष्टमी और महालया जैसे महत्वपूर्ण हिंदू पर्वों पर कोई सार्वजनिक अवकाश नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा मई दिवस को भी छुट्टी की सूची से हटा दिया गया है। सरकार की गाइडलाइंस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन सभी दिनों में स्कूल और शैक्षणिक संस्थान खुले रहेंगे।
Bangladesh 2026 Holiday: धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने के आरोप
छुट्टियों में कटौती और हिंदू पर्वों को नजरअंदाज किए जाने के बाद बांग्लादेश में कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया है। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को सीमित करता है। हालांकि, सरकार की ओर से रमजान और ईद-उल-फितर पर छुट्टियां दी गई हैं, लेकिन पहले के मुकाबले इन छुट्टियों की संख्या भी कम कर दी गई है।
भाषा शहीद दिवस को लेकर भी उठा सवाल
विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा। आधिकारिक छुट्टियों की सूची में 21 फरवरी, यानी भाषा शहीद दिवस का भी अलग से उल्लेख नहीं किया गया है। इसे लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि यूनुस सरकार बांग्लादेश के इतिहास से भाषा आंदोलन की अहमियत को कम करने की कोशिश कर रही है। अंतरिम सरकार के फैसलों को लेकर कहा जा रहा है कि पिछले डेढ़ साल में कई ऐतिहासिक प्रतीकों और घटनाओं को हाशिये पर डाल दिया गया है।
सरकार का पक्ष और सफाई
यूनुस सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि 21 फरवरी 2026 को शनिवार है और बांग्लादेश में शुक्रवार व शनिवार पहले से ही साप्ताहिक अवकाश होते हैं। इसी वजह से भाषा दिवस का अलग से उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि, आलोचक याद दिलाते हैं कि 2025 में भी 21 फरवरी शुक्रवार को पड़ा था, जो पहले से साप्ताहिक अवकाश था, फिर भी उसे आधिकारिक रूप से भाषा दिवस की छुट्टी के रूप में नोटिफाई किया गया था।
शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रिया
प्रख्यात शिक्षाविद पवित्र सरकार ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि 21 फरवरी को बंगाली भाषा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली थी और इसका इतिहास दुनिया की कई भाषाओं से जुड़ा है। उनके अनुसार, भाषा आंदोलन बांग्लादेश की आजादी के संघर्ष की नींव रहा है और इसे नजरअंदाज करना देश के इतिहास के साथ अन्याय है।
भाषा आंदोलन का ऐतिहासिक महत्व
21 फरवरी 1952 को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में छात्रों ने बंगाली को राज्य भाषा बनाने की मांग को लेकर आंदोलन किया था। इस आंदोलन के दौरान कई छात्रों की जान गई। माना जाता है कि यही भाषा आंदोलन आगे चलकर बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक बना। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण भाषा शहीद दिवस को बांग्लादेश की पहचान का अहम हिस्सा माना जाता है।2026 की छुट्टियों की सूची ने बांग्लादेश में धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हिंदू पर्वों और भाषा शहीद दिवस को लेकर लिए गए फैसलों ने यूनुस सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा देश की राजनीति और सामाजिक सौहार्द पर क्या असर डालेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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