Bandi Sanjay Son Case : केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी बागीरथ की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। तेलंगाना उच्च न्यायालय (High Court) ने एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामले में बंदी बागीरथ को किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने बागीरथ की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया।
जस्टिस टी माधवी देवी की एकल पीठ के समक्ष शुक्रवार की शाम इस बेहद संवेदनशील अग्रिम जमानत याचिका पर मैराथन सुनवाई शुरू हुई, जो करीब आधी रात तक चलती रही। बागीरथ के कानूनी सलाहकारों ने अदालत से पुरजोर मांग की थी कि जब तक याचिका पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक पुलिसिया गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई जाए, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और अब इस मामले पर अगली वेकेशन कोर्ट में सुनवाई होगी।
नाबालिग की मां ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप, दर्ज हुआ पॉक्सो केस
यह पूरा आपराधिक मामला इसी महीने मई को तब प्रकाश में आया जब एक वर्षीय नाबालिग लड़की की मां ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने बंदी बागीरथ के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। पीड़िता की मां का सीधा आरोप है कि बागीरथ उनकी नाबालिग बेटी के साथ पिछले सात-आठ महीनों से लगातार संपर्क में था और इस दौरान उसने शादी का झांसा देकर लड़की का शारीरिक व मानसिक शोषण (यौन उत्पीड़न) किया।
मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता के धारा के तहत बयान दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमे में पोक्सो कानून की कड़े प्रावधानों वाली धाराएं जोड़ दीं। अदालत में पीड़ित पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि चूंकि आरोपी का परिवार बेहद प्रभावशाली राजनीतिक पृष्ठभूमि से आता है, इसलिए उसे राहत मिलने पर वह गवाहों को डरा सकता है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।
बचाव पक्ष का हनी ट्रैप और ५ करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का पलटवार
दूसरी तरफ, आरोपी बंदी बागीरथ के वकीलों ने इन तमाम आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित बताते हुए अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष का दावा है कि शिकायतकर्ता महिला ने खुद स्वीकार किया है कि उसकी बेटी वर्ष से ही बागीरथ के साथ एक आपसी सहमति वाले रिश्ते (रिलेशनशिप) में थी। वकीलों ने आरोप लगाया कि लड़की का परिवार बागीरथ पर जबरन शादी करने का अनुचित दबाव बना रहा था।
बचाव पक्ष के मुताबिक, यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश, हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग का है, जिसमें हजार रुपये ऐंठने के बाद अब आरोपी के परिवार से करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगी जा रही है और पैसे न देने पर पॉक्सो एक्ट के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई। इस बीच, सुनवाई के दौरान जस्टिस माधवी देवी ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि इस केस को लेकर सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चलाया गया दुष्प्रचार अभियान अत्यंत पीड़ादायक है।
बंदी संजय ने कहा- कानून सबके लिए बराबर, बीआरएस नेता केटीआर ने मांगा इस्तीफा
इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद पर केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने बेहद नपा-तुला बयान देते हुए कहा कि कानून की नजर में देश का हर नागरिक बराबर है और वह अपने बेटे का बिल्कुल भी बचाव नहीं कर रहे हैं। अगर जांच में उनका बेटा दोषी पाया जाता है, तो उसे कानून के मुताबिक सख्त सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, इस मुद्दे पर तेलंगाना की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है।
भारत राष्ट्र समिति (BRS) के वरिष्ठ नेता केटी रामा राव (KTR) ने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली और भाजपा की ‘बेटी बचाओ’ मुहिम पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। केटीआर ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री का बेटा होने के कारण पुलिस कार्रवाई में जानबूझकर देरी की गई। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार से तुरंत इस्तीफा लिया जाए। इसी बीच, हैदराबाद के खैरताबाद बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बागीरथ के ‘लापता’ होने के विवादित पोस्टर भी चिपकाए गए हैं।










