Balochistan Independence: क्या पाकिस्तान से अलग होने वाला है बलूचिस्तान? पूर्व मुख्यमंत्री ने किया बड़ा खुलासा

पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में आजादी की चिंगारी अब शोला बन चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने जिस तरह से पाकिस्तान सरकार की नीतियों को विफल बताया और बलूच जनता की भावनाओं का समर्थन किया, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। क्या ये पाकिस्तान के एक और विभाजन की शुरुआत है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 13, 2026

Balochistan Independence :  पाकिस्तान के बलूचिस्तान में अलगाव की मांग फिर से जोर पकड़ रही है। बलूचिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री, सरदार अख्तर मेंगल ने खुले तौर पर कहा है कि अब बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान अब पाकिस्तान का सूबा नहीं रहेगा, बल्कि वह पाकिस्तान का पड़ोसी बनेगा।” यह बयान उन्होंने लाहौर में प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मां जहांगीर की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया। इस कार्यक्रम में बलूचिस्तान के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों, सरदार अख्तर मेंगल और अब्दुल मलिक बलोच को भी आमंत्रित किया गया था।

पाकिस्तान पर जुल्म का आरोप, स्वतंत्रता की बात

सरदार अख्तर मेंगल ने पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कहा कि बलूच लोगों पर पाकिस्तान ने अत्याचार की हद पार कर दी है, और अब बलूचिस्तान स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ चुका है। उन्होंने 1971 का उदाहरण देते हुए कहा, “जैसे पूर्वी पाकिस्तान ने पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश का रूप लिया, ठीक वैसे ही बलूचिस्तान भी पाकिस्तान से अलग होकर अपना रास्ता तय करेगा।” मेंगल ने बलूचिस्तान में पाकिस्तान की सेना द्वारा चलाए जा रहे सैन्य अभियान पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि बलूच लोग पाकिस्तानी सेना और सरकार से नफरत करते हैं और बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के सदस्यों को सम्मान देते हैं।

BLA का बढ़ता समर्थन, 31 जनवरी की बगावत का जिक्र

सरदार अख्तर मेंगल ने 31 जनवरी को बलूचिस्तान में हुई बड़ी बगावत का उल्लेख करते हुए कहा कि बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का समर्थन लगातार बढ़ रहा है। यह बात साफ दर्शाती है कि बलूचिस्तान अब आजादी की राह पर आगे बढ़ चुका है। उनके अनुसार, बलूचिस्तान के लोग अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इस संघर्ष में वे पाकिस्तान की सेना से पूरी तरह विरोधाभास रखते हैं। उनका मानना है कि बलूचिस्तान अब पाकिस्तान से मुक्त होने के लिए तैयार है।

पाकिस्तान सरकार का जवाब: स्वतंत्रता नहीं, दहशतगर्दी

सरदार मेंगल के इन बयानों का पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राना सनाउल्लाह ने कड़ा जवाब दिया। राना सनाउल्लाह ने कहा कि बलूचिस्तान में जो कुछ हो रहा है, वह आजादी की लड़ाई नहीं है, बल्कि दहशतगर्दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बलूच लिबरेशन आर्मी के लोग आम नागरिकों को मार रहे हैं, सुरक्षा बलों पर हमले कर रहे हैं, और पुलिस को निशाना बना रहे हैं, यही कारण है कि बलूचिस्तान में सैन्य अभियान चलाया जा रहा है। राना सनाउल्लाह के इस बयान का तीखा विरोध किया गया, और कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनकी बातों का बहिष्कार किया।

लाहौर में पाकिस्तान के बंटवारे की बात, इतिहास की पुनरावृत्ति

बलूचिस्तान में अलगाववादी भावना का बढ़ता प्रभाव पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मचा रहा है। 1940 में लाहौर में ही पाकिस्तान बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था, और अब उसी लाहौर में पाकिस्तान के बंटवारे की बात हो रही है। सरदार अख्तर मेंगल की हिम्मत को सराहा जा रहा है, क्योंकि जब पाकिस्तान की सेना बलूच युवाओं का खून बहा रही है और सरकार अलगाववादियों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, तब सरकार के प्रतिनिधियों के सामने जाकर बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की बात करना कोई आसान कदम नहीं था। यह घटना पाकिस्तान के अंदर बढ़ते असंतोष और बलूचिस्तान की आजादी की मांग को लेकर नए सवाल खड़े करती है।

पाकिस्तान सरकार की चुप्पी, स्थिति पर सवाल

हालांकि, बलूचिस्तान में बढ़ते असंतोष और अलगाववाद को लेकर पाकिस्तान सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन, सरदार अख्तर मेंगल के बयानों और बलूचिस्तान में चल रही घटनाओं ने पाकिस्तान की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार के लिए इस स्थिति से निपटना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि बलूचिस्तान में असंतोष और आजादी की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

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