Balochistan: बलूचिस्तान में नरसंहार! ‘किल एंड डंप’ नीति के तहत बेगुनाह बलूचों की हत्या, पाकिस्तान की साजिश का पर्दाफाश

बलूचिस्तान से आ रही खबरें रूह कंपा देने वाली हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां और सेना 'किल एंड डंप' अभियान के जरिए बलूच आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रही हैं। हर दिन दर्जनों लोग लापता हो रहे हैं और हफ्तों बाद उनकी लाशें मिलती हैं। क्या दुनिया इस नरसंहार को रोकने के लिए आगे आएगी?

Balochistan

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 9, 2026

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Balochistan: बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने अवारन जिले के दो सगे भाइयों, नादिल बलूच और शेर जान की गैर-कानूनी हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है। आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने इन दोनों भाइयों को पहले जबरन गायब किया और फिर उनकी हत्या कर दी। नादिल बलूच का गोलियों से छलनी शव 8 मार्च को अवारन के जाहू इलाके में फेंक दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, नादिल को लगभग चार महीने तक अवैध हिरासत में प्रताड़ित किया गया था। उसी दिन, उसके भाई शेर जान का क्षत-विक्षप्त शव भी अवारन के तीरतागे इलाके से बरामद हुआ। शेर जान को नवंबर 2025 में हब चौकी बाजार से सुरक्षा एजेंसियों ने उठाया था।

बलूचिस्तान में ‘किल एंड डंप’ नीति का खौफनाक चेहरा

मानवाधिकार संस्था ‘पांक’ ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ये हत्याएं बलूचिस्तान में पाकिस्तान की कुख्यात ‘किल एंड डंप’ (मारो और फेंक दो) नीति का स्पष्ट प्रमाण हैं। इस खौफनाक पैटर्न के तहत, सुरक्षा एजेंसियां पहले नागरिकों को बिना किसी कानूनी आधार के उठा लेती हैं, उन्हें महीनों तक गुप्त कालकोठरियों में रखा जाता है और अंततः उनकी हत्या कर शवों को लावारिस हालत में फेंक दिया जाता है। अवारन की घटना के अलावा, 5 मार्च को पंजगुर जिले के परूम इलाके में भी दो युवा ड्राइवरों, 20 वर्षीय नियाज बलूच और जाकिर बलूच की ‘डेथ स्क्वाड’ द्वारा हत्या कर दी गई। इन बढ़ती घटनाओं ने स्थानीय आबादी के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

स्वतंत्र जांच की मांग: पंजगुर में लगातार मिलते क्षत-विक्षप्त शव

‘पांक’ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नियाज और जाकिर की हत्याओं की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की पुरजोर मांग की है। बलूचिस्तान के पंजगुर इलाके में हिंसा का सिलसिला यहीं नहीं थमा। 6 मार्च को हलीम बलूच नामक व्यक्ति का शव भी बेहद खराब स्थिति में सरीकुरान इलाके से मिला। हलीम पंजगुर के खुदाबदन में अपनी छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। उसे 20 फरवरी को कथित तौर पर पाकिस्तानी डेथ स्क्वॉड ने उसके घर से अगवा किया था। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि आम नागरिकों, व्यापारियों और छात्रों को निशाना बनाना अब वहां एक सामान्य बात हो गई है।

BYC का बड़ा दावा: वकील हम्माल हसनी और उमर जान की हत्या

एक अन्य प्रमुख मानवाधिकार संगठन, बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने भी पाकिस्तानी फ्रंटियर कॉर्प्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। BYC के अनुसार, 6 मार्च को पंजगुर के कोह सब्ज पलंतक इलाके में बलूच वकील हम्माल हसनी की हत्या कर दी गई। संगठन ने इसे ‘किल-एंड-डंप’ पैटर्न का हिस्सा बताया है, जहां शिक्षित और जागरूक बलूच नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी तरह, 5 मार्च को 19 वर्षीय ड्राइवर उमर जान को भी परूम इलाके में गोलियों से भून दिया गया। BYC ने दावा किया है कि ये हमले पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड द्वारा किए जा रहे हैं ताकि बलूच राष्ट्रवाद की आवाज को कुचला जा सके।

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की अपील: बलूच पहचान पर बढ़ता संकट

बलूचिस्तान में हो रही इन लक्षित हत्याओं और जबरन गुमशुदगी की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बलूच यकजेहती कमेटी और ‘पांक’ दोनों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक निकायों से इस मानवीय संकट में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठनों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने पाकिस्तान पर दबाव नहीं बनाया, तो बलूचिस्तान में नरसंहार की स्थिति और भयावह हो सकती है। बलूच नागरिक अब अपनी सुरक्षा और अस्तित्व को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को सैन्य ताकत के बल पर दबाने की कोशिशें जारी हैं।

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