Ballia Accident : बलिया में गंगा स्नान के दौरान दर्दनाक हादसा, मुंडन की खुशियां मातम में बदली, चार मौत

बलिया के गंगा घाट पर आज उस वक्त कोहराम मच गया जब मुंडन संस्कार के दौरान स्नान करने उतरे एक ही परिवार के चार लोग गहरे पानी में समा गए। देखते ही देखते उत्सव की खुशियां चीख-पुकार में बदल गईं। आखिर गोताखोरों के आने तक क्या हुआ घाट पर? जानिए इस हृदय विदारक घटना का सच।

Ballia Accident

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 3, 2026

Ballia Accident : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से रविवार को एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। फेफना थाना क्षेत्र के कल्याणीपुर गांव के वशिष्ठ चौहान के घर में मुंडन संस्कार का उल्लास था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। परिवार और रिश्तेदार मुंडन की रस्म निभाने के लिए उत्साह के साथ बलिया शहर कोतवाली क्षेत्र के शिवरामपुर घाट (ब्यासी) पहुंचे थे। गंगा के तट पर मंगल गीतों के बीच रस्में शुरू हुईं, लेकिन तभी स्नान के दौरान अचानक चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते छह लोग गंगा की लहरों में समाने लगे और पल भर में खुशियों भरा माहौल मातम की चीखों में तब्दील हो गया।

बचाने की कोशिश में गहरे पानी में समाए मासूम और युवा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रस्मों के बीच जब परिवार के लोग गंगा में डुबकी लगा रहे थे, तभी चार लड़कियां अनजाने में गहरे पानी की तरफ चली गईं। पानी का तेज बहाव और गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए घाट पर मौजूद दो जांबाज युवक भी बिना सोचे-समझे नदी में कूद पड़े। हालांकि, गंगा की लहरें इतनी प्रबल थीं कि बचाने गए युवक भी खुद को संभाल नहीं पाए और वे भी गहरे पानी की चपेट में आ गए। घाट पर मौजूद अन्य लोगों ने शोर मचाया, जिसके बाद कुछ स्थानीय तैराकों ने तुरंत पानी में छलांग लगाई।

चार घरों के चिराग बुझे: मृतकों की हुई पहचान

स्थानीय लोगों और गोताखोरों की तत्परता से एक युवती और एक युवक को तो सकुशल बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अन्य चार लोग लापता रहे। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचा। एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने से पहले ही स्थानीय गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद चार शवों को बाहर निकाला। मृतकों में गड़वार थाना क्षेत्र के रामपुर भोज निवासी हर्षिता (17 वर्ष) और नंदिता (12 वर्ष) शामिल हैं। इनके अलावा, गाजीपुर जिले के खिलाड़ी महेशपुर निवासी दो सगे भाइयों जैसे मित्र अर्जुन चौहान (19 वर्ष) और अरुण चौहान (20 वर्ष) की भी इस हादसे में मौत हो गई।

प्रशासनिक मुस्तैदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश

हादसे की भयावहता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) तुरंत शिवरामपुर घाट पहुंचे और बचाव कार्य की निगरानी की। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना का तत्काल संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा, उन्होंने घायलों के समुचित और मुफ्त इलाज के लिए प्रशासन को सख्त आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है।

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल: नदी घाटों पर सतर्कता की कमी

इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर नदी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। बलिया जैसे जिलों में जहां लोग धार्मिक आयोजनों के लिए भारी संख्या में नदियों के किनारे जुटते हैं, वहां गहराई की चेतावनी देने वाले साइनबोर्ड या बैरिकेडिंग का न होना जानलेवा साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि घाटों पर गोताखोरों की तैनाती और सुरक्षित स्नान क्षेत्र का निर्धारण पहले से होता, तो शायद इन चार मासूम जिंदगियों को बचाया जा सकता था। फिलहाल, पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मुंडन वाले घर में कोहराम मचा हुआ है।

एक मामूली सी चूक ने मुंडन के उत्सव को एक ऐसे गहरे जख्म में बदल दिया, जिसकी टीस कल्याणीपुर और आसपास के गांवों में लंबे समय तक महसूस की जाएगी। प्रशासन अब आगामी स्नान पर्वों को देखते हुए घाटों पर चौकसी बढ़ाने की बात कह रहा है।

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