Balendra Shah Nepal PM: नेपाल में बालेंद्र शाह का राजतिलक, 27 मार्च को लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ, RSP की प्रचंड जीत से रचा इतिहास

नेपाल के इतिहास में पहली बार किसी गैर-पारंपरिक पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत पाकर सबको चौंका दिया है। पूर्व मेयर बालेंद्र शाह अब देश की कमान संभालने जा रहे हैं। 27 मार्च को होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह नेपाल की तस्वीर और तकदीर कैसे बदलेगा? जानिए बालेन के 'मिशन नेपाल' का पूरा सच।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 20, 2026

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Balendra Shah Nepal PM: नेपाल की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात हो गया है। हाल ही में संपन्न हुए प्रतिनिधि सभा के चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत के बाद, युवा नेता बालेंद्र शाह 27 मार्च, 2026 को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इस जीत ने न केवल पारंपरिक राजनीतिक दलों के वर्चस्व को समाप्त किया है, बल्कि नेपाल के युवाओं और आम जनता की नई आकांक्षाओं को भी स्वर दिया है। पार्टी की इस शानदार सफलता के बाद अब पूरे देश की निगाहें काठमांडू में होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।

शपथ ग्रहण समारोह की रूपरेखा और तैयारी

प्रधानमंत्री के आधिकारिक शपथ ग्रहण से ठीक एक दिन पहले, यानी 26 मार्च को, नवनिर्वाचित सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। आरएसपी के अध्यक्ष रवि लामिछाने, बालेंद्र शाह, और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं—डीपी अर्याल व स्वर्णिम वाग्ले—की उच्च स्तरीय बैठक में इन तारीखों पर अंतिम मुहर लगाई गई। संघीय संसद सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि चूँकि नया संसद भवन अभी निर्माणाधीन है, इसलिए सांसदों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम एक अस्थायी हॉल में आयोजित किया जाएगा। सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर बुनियादी ढांचे, जैसे लाइटिंग और साउंड सिस्टम का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

निर्वाचन आयोग की औपचारिक घोषणा और राष्ट्रपति को रिपोर्ट

नेपाल निर्वाचन आयोग ने आम चुनाव के अंतिम परिणामों को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। इसके साथ ही चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया का समापन हो गया है। बता दें कि 275 सदस्यीय निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) के लिए 5 मार्च को मतदान हुआ था। इसमें 165 सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली से और 110 सदस्य आनुपातिक प्रणाली के माध्यम से चुने गए हैं। कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने राष्ट्रपति को जानकारी दी कि पूरी चुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, जिस पर राष्ट्रपति ने गहरा संतोष व्यक्त किया।

RSP का प्रचंड बहुमत और पारंपरिक दलों का सूपड़ा साफ

इस चुनाव के परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 275 में से 182 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। वहीं, देश की सबसे पुरानी पार्टी ‘नेपाली कांग्रेस’ मात्र 38 सीटों पर सिमट गई है। अन्य प्रमुख दलों में सीपीएन-यूएमएल को 25, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को 17, श्रम संस्कृति पार्टी को 7 और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी को केवल 5 सीटें मिली हैं। आरएसपी की इस लहर ने नेपाल के राजनीतिक मानचित्र को पूरी तरह बदल दिया है, जहाँ जनता ने पुराने चेहरों के बजाय विकास और बदलाव को प्राथमिकता दी है।

दिग्गजों की हार और नेपाली कांग्रेस में इस्तीफों का दौर

नेपाली कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। पार्टी के अध्यक्ष गगन थापा ने करारी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। विशेष रूप से, थापा खुद धनुषा-4 निर्वाचन क्षेत्र से आरएसपी के उम्मीदवार अमरेश सिंह से चुनाव हार गए। पार्टी ने 100 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन उसे उम्मीद से बहुत कम सफलता मिली। इस हार के बाद 20 मार्च को नेपाली कांग्रेस की केंद्रीय कार्य समिति की बैठक बुलाई गई है, जिसमें हार के कारणों और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।

बालेंद्र शाह: नेपाल के भविष्य की नई उम्मीद

बालेंद्र शाह का प्रधानमंत्री बनना नेपाल की राजनीति में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। एक इंजीनियर और रैपर से राजनेता बने बालेंद्र ने पहले काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित की और अब वे पूरे देश की कमान संभालने जा रहे हैं। आरएसपी ने चुनाव प्रचार के दौरान ही उन्हें अपना ‘पीएम कैंडिडेट’ घोषित कर दिया था, जिससे जनता को एक स्पष्ट विकल्प मिला। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार नेपाल की आर्थिक चुनौतियों और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को किस प्रकार नई दिशा देती है।

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