Badrinath Dham: बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बैठाई बड़ी जांच

उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी। इस बीच मंदिर समिति (BKTC) ने आरोपी निजी सहायक को निलंबित कर दिया है।

Badrinath Dham

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 8, 2026

Badrinath Dham: अयोध्या के राम मंदिर के बाद अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति (High-Level Committee) का गठन किया गया है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस विशेष जांच दल को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सुधारात्मक संस्तुतियां सरकार को सौंपनी होंगी, ताकि मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाई जा सके।

जांच समिति का प्रशासनिक ढांचा

बताते चले कि, सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, इस तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष आयुक्त गढ़वाल मंडल (कमिश्नर गढ़वाल) होंगे। उनके साथ समिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कार्यालय के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान को बतौर सदस्य नियुक्त किया गया है। यह उच्चाधिकार प्राप्त समिति बदरीनाथ मंदिर परिसर में प्राप्त होने वाले गुप्त दान, वीआईपी चढ़ावे और रसीदों से संबंधित कथित गड़बड़ियों के हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच करेगी।

मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता के उपाय

शासन के आदेशानुसार, वित्तीय जांच प्रक्रिया के दौरान यदि आवश्यकता पड़ती है, तो यह त्रिसदस्यीय समिति किसी भी सरकारी अधिकारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, ऑडिट विशेषज्ञ या अन्य संबंधित व्यक्ति का सहयोग और कानूनी परामर्श ले सकेगी। इस निष्पक्ष जांच का मुख्य उद्देश्य न केवल सच का पता लगाना है, बल्कि भविष्य में दान-चढ़ावे के पूरे प्रबंधन तंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी सुधारात्मक सुझाव शासन को देना भी है, जिससे मंदिर व्यवस्था में आम जनता और सनातन धर्मावलंबियों का विश्वास मजबूत बना रहे।

आरोपों के घेरे में आए निजी सहायक प्रमोद नौटियाल निलंबित

इस पूरे विवाद के बीच, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने भी आंतरिक स्तर पर सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आरोपों के केंद्र में आए बीकेटीसी अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निजी सहायक (PA) प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। यह अनुशासनात्मक कार्रवाई तब सामने आई जब मंगलवार को मंदिर समिति की चार सदस्यों वाली आंतरिक टीम ने बद्रीनाथ धाम पहुंचकर वहां के वित्तीय मैनेजमेंट और रिकॉर्ड की स्क्रूटनी शुरू की। BKTC के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि शुरुआती जांच में कुछ गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद ही पीए को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया।

आंतरिक ऑडिट और सोशल मीडिया पर उठे सवाल

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बदरीनाथ धाम में दान-दक्षिणा और चढ़ावे के लेखा-जोखा में कथित हेरफेर के आरोप खुलकर सामने आए थे। जनभावनाओं को देखते हुए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक आंतरिक 4 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। इस डोमेस्टिक इंक्वायरी कमेटी में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल, विधि अधिकारी एस.एस. बर्त्वाल, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी और केदारनाथ के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डी.एस. भुजवान को शामिल किया गया था, जिनकी शुरुआती रिपोर्ट के बाद अब राज्य सरकार ने भी मोर्चा संभाल लिया है।