
Baba Ramdev : उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बबराला में आयोजित प्रांतीय आर्य महासम्मेलन के समापन समारोह में योग गुरु बाबा रामदेव ने धर्म, राजनीति और नेताओं की बयानबाजी पर अपनी राय रखी। इस दौरान उनके एक बयान ने राजनीतिक चर्चा को हवा दे दी। रामदेव ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का जिक्र करते हुए कहा कि वह दूसरे स्थानों के लिए अच्छे हों या न हों, लेकिन उत्तर प्रदेश के लिए काफी अच्छे हैं। उन्होंने इसके पीछे वोटों के बंटवारे की संभावित स्थिति को वजह बताया।
ओवैसी के कारण किसे मिल सकता है राजनीतिक फायदा?
बाबा रामदेव से अखिलेश यादव की सरकार और ओवैसी के उत्तर प्रदेश को लेकर दिए गए बयान के संदर्भ में सवाल पूछा गया था। जवाब में उन्होंने कहा कि ओवैसी की मौजूदगी से कुछ राजनीतिक दलों के वोट बंट सकते हैं। रामदेव के मुताबिक, ऐसी स्थिति का फायदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिल सकता है। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश में संभावित चुनावी समीकरणों और विपक्षी वोटों के बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, किसी दल को वास्तविक लाभ होगा या नहीं, यह मतदाताओं के रुख, उम्मीदवारों और चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
सनातन धर्म में आडंबर और अंधविश्वास पर उठाए सवाल
सम्मेलन के दौरान बाबा रामदेव ने सनातन धर्म के नाम पर कथित ढोंग, अंधविश्वास और आडंबर फैलाने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से दुनिया में सनातन धर्म की छवि प्रभावित होती है। रामदेव के अनुसार, कुछ लोग भगवान राम, कृष्ण और शिव का रूप धारण करके धर्म के मूल संदेश से अलग आचरण करते हैं। उन्होंने तीर्थस्थलों और शास्त्रों के नाम पर गलत काम करने वालों पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि धर्म के नाम पर झूठ और फरेब समाज तथा देश को नुकसान पहुंचाते हैं।
वेदों और महर्षि दयानंद के सिद्धांतों का किया जिक्र
बाबा रामदेव ने अपने संबोधन में आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती और वेदों की शिक्षाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोगों को धर्म के मूल सिद्धांतों को समझना चाहिए और अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए। रामदेव ने आर्य, हिंदू और वैदिक परंपरा के आदर्शों पर जोर देते हुए समाज में सत्य, नैतिकता और अच्छे आचरण को बढ़ावा देने की बात कही। उनके अनुसार, धर्म का उद्देश्य केवल बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि व्यक्ति और समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।

‘अच्छी आत्माओं’ के शासन की बात कही
रामदेव ने कहा कि देश में ऐसे लोगों का नेतृत्व होना चाहिए, जिनका आचरण अच्छा हो और जो समाज में दिव्यता तथा नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाएं। उन्होंने इसे धर्म से जुड़ा संघर्ष बताया। अपने संबोधन में उन्होंने योगी आदित्यनाथ का भी जिक्र किया और ऐसे नेतृत्व की बात की, जिसे वह धर्म के आदर्शों के अनुरूप मानते हैं। उनके विचारों में धार्मिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और राजनीतिक नेतृत्व के बीच संबंध दिखाई दिया।
नेताओं की बयानबाजी पर भी जताई नाराजगी
कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने कहा कि किसी भी नेता को ओछी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, ऐसी बयानबाजी पक्ष और विपक्ष दोनों को शोभा नहीं देती। उन्होंने कहा कि साधु-संत सभी के कल्याण की कामना करते हैं। बबराला के सम्मेलन में धर्म और राजनीति पर दिए गए उनके बयानों में ओवैसी को लेकर की गई टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। हालांकि, उनके बयान में व्यक्त चुनावी आकलन को संभावित राजनीतिक परिदृश्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी चुनावी नतीजे की निश्चित भविष्यवाणी के रूप में।
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