Bengal News: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बाबा बागेश्वर का पहला बड़ा गीता पाठ, गूंजा ‘जय श्री राम’

पश्चिम बंगाल में बाबा बागेश्वर यानी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के गीता पाठ कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटी। मंच से उन्होंने गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला घोषित करने, गोमाता को ‘राजमाता’ का दर्जा देने और काली पूजा के दौरान दंगों पर रोक लगाने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सनातन संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराया।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 7, 2026

Bengal News: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार अपने चिर-परिचित अंदाज में गीता पाठ करने पहुंचे जहां राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंच पर उनका स्वागत किया।इस दौरान बागेश्वर धाम ने सीएम सुवेंदु के सामने अपनी ऐसी 3 बड़ी मांगे रख दी जिसकी चर्चा बंगाल से लेकर दिल्ली तक जोरों-शोरों से हो रही है

बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री की हुंकार

बंगाल में एक तरफ गंगासागर को राष्ट्रीय मेला बनाने की हुंकार, तो दूसरी तरफ गलियों-मोहल्लों में होने वाले दंगों पर फुल स्टॉप लगाने का अल्टीमेटम!धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने ममता बनर्जी पर तंज कसा और सुवेंदु अधिकारी को सनातन सरकार का जिक्र कहकर संबोधित किया।

बंगाल में पहली बार आयोजित गीता पाठ

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बंगाल में पहली बार आयोजित गीता पाठ

जिस बंगाल की जमीन पर कभी ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने पर भी पाबंदियों की दीवारें खड़ी की जाती थीं, आज उसी बंगाल की छाती पर बागेश्वर धाम के सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हुंकार भर रहे हैं। मौका है पश्चिम बंगाल में पहली बार आयोजित हुए भव्य गीता पाठ और कथा कार्यक्रम का।हावड़ा से लेकर कोलकाता तक, जिधर देखिए उधर जनसैलाब ही जनसैलाब नजर आ रहा है। लाखों की संख्या में पहुंचे सनातनी भक्त और हाथों में भगवा थामे युवा—यह नजारा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन का नहीं, बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक बदलाव की एक बहुत बड़ी पटकथा लिख रहा है।

सुवेंदु अधिकारी ने किया बाबा का स्वागत

धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान कोई आम बयान नहीं है।उनका बयान बंगाल की धरती से आया है, जिसे राजनीतिक गलियारों में ध्रुवीकरण और तुष्टिकरण का अखाड़ा कहा जाता रहा है। लेकिन इस बार मंच पर सिर्फ बाबा अकेले नहीं थे, बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी खुद सनातनी संस्कृति के इस महाकुंभ में हाजिरी लगाने पहुंचे थे। और फिर जो मंच से कहा गया, उसने सियासत के तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया।”

गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला घोषित करने की मांग

बाबा ने साफ शब्दों में कहा कि,बंगाल का ऐतिहासिक गंगासागर मेला केवल एक राज्य का पर्व नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की सनातन आस्था का प्रतीक है। इसलिए इसे फौरन ‘राष्ट्रीय मेला’ घोषित किया जाना चाहिए।धीरेंद्र शास्त्री ने कहा,देश की संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली गोमाता के सम्मान में अब कोई कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। शास्त्री ने मांग की कि गोमाता को राष्ट्र स्तर पर ‘राजमाता’ का दर्जा मिलना चाहिए।साथ ही बाबा ने दो टूक कहा— “काली पूजा के दौरान गलियों-मोहल्लों में होने वाले छोटे-छोटे दंगे अब बंद होने चाहिए।बंगाल में अब हर-हर गंगे होना चाहिए।

सनातन संस्कृति की रक्षा पर जोर

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़े और कड़े ऐलान कर दिए हैं। सीएम सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि,राज्य में सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।हमारी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए आयोग बनाया है, और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि,जिस तरह से लाखों की संख्या में बंगाली युवाओं और आम जनता ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा में हिस्सा लिया है उसने इतना तो साफ कर दिया है कि,बंगाल की हवा का रुख किस ओर मुड़ रहा है।