Ayodhya Ram Temple Donation Row: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में मिले दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में बदल चुका है। इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार और जांच एजेंसी पर बेहद तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इस पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए सबूतों को मिटाने की आशंका जाहिर की है।
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‘दिन इसलिए बढ़ा रहे हैं ताकि सबूत ठिकाने लगा सकें’ — अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “SIT ध्यान रखे। कहीं जांच की रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। फिर कहेंगे 15 दिन और इंतजार कर लो। दिन इसलिए बढ़ा रहे हैं, क्योंकि सबूत ठिकाने लगा रहे हैं।” अखिलेश यादव का यह बयान उस समय आया है जब विपक्षी दल इस पूरे मामले में सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। सपा प्रमुख का सीधा आरोप है कि जांच में हो रही देरी का फायदा उठाकर दोषी लोग महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट या प्रभावित कर सकते हैं। वे लगातार इस मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र निगरानी में जांच की मांग कर रहे हैं।
शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा
दूसरी तरफ, अयोध्या में डेरा डाले हुए एसआईटी की टीम ने अपनी प्रारंभिक जांच तेज कर दी है। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती जांच में भगवान राम को देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी के आभूषणों, बेशकीमती हीरों और अन्य रत्नों के सरकारी व आंतरिक रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी और विसंगतियां सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि जब एसआईटी की टीम ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इन बहुमूल्य धातुओं और आभूषणों के स्टॉक रजिस्टर, मूल्यांकन रिपोर्ट और जमा रसीदों के बारे में पूछताछ की, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब या दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सके। रिकॉर्ड का यह अधूरापन और विसंगतियां करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की ओर इशारा कर रही हैं।
एसआईटी की सख्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने कड़ा रुख अपनाया है। लखनऊ मुख्य मुख्यालय रवाना होने से ठीक पहले एसआईटी के आला अधिकारियों ने राम मंदिर ट्रस्ट के संबंधित पदाधिकारियों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे जांच पूरी होने तक बिना लिखित अनुमति के अयोध्या से बाहर नहीं जा सकते।
विदित हो कि राम मंदिर ट्रस्ट में चंदे और चढ़ावे की कथित हेराफेरी की शिकायतें सामने आने के बाद, स्वयं ट्रस्ट के आग्रह पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बीती 13 जून को विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। वर्तमान में एसआईटी अपनी अंतरिम रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस रिपोर्ट के आने के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल और तेज होना तय माना जा रहा है।
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