Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। ट्रस्ट के भीतर चल रही उठापटक के बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की संदिग्ध भूमिका और चंपत राय के साथ उनकी हालिया गुप्त मुलाकात ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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गुप्त बैठक और बढ़ता संदेह
हाल ही में जब चंपत राय ने चंदा चोरी विवाद के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया, तो पूरे देश में इसकी चर्चा हुई। इस घटनाक्रम के महज कुछ दिन बाद ही कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने गुरुवार को चंपत राय के आवास पर पहुंचकर उनसे बंद कमरे में लंबी बातचीत की। बताया जा रहा है कि यह बैठक करीब दो घंटे तक चली। महत्वपूर्ण बात यह है कि गोविंद देव गिरि ने मीडिया के कैमरों से बचते हुए मुलाकात की, जिससे इस गुप्त बैठक को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
विवाद इस बात को लेकर है कि जिस व्यक्ति (चंपत राय) के इस्तीफे को मंजूर करने की आधिकारिक घोषणा स्वयं गोविंद देव गिरि ने की थी, अब उन्हीं के साथ वे इतनी सक्रियता से और गुप्त रूप से क्यों मिल रहे हैं? यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब चंपत राय की कार्यशैली और मंदिर के फंड के ऑडिट को लेकर ट्रस्ट पर पहले ही उंगलियां उठ रही हैं।
कोषाध्यक्ष की बदलती भूमिका
गोविंद देव गिरि की भूमिका पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि शुरुआती दौर में उन्होंने इस पूरे कांड के लिए परोक्ष रूप से चंपत राय की जवाबदेही तय की थी। दिलचस्प बात यह है कि मंदिर के चढ़ावे और दान के फंड का ऑडिट उन्हीं के द्वारा नियुक्त सीए (CA) की निगरानी में होता रहा है। अब जब अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो कोषाध्यक्ष के रूप में उनकी अपनी कार्यप्रणाली और पारदर्शिता भी संदेह के घेरे में है।
तमाम आरोपों के बावजूद, गोविंद देव गिरि लगातार चंपत राय का बचाव करते नजर आए हैं। इस्तीफे के बाद भी उनका चंपत राय को ‘निर्दोष’ बताना और उनके साथ लगातार संपर्क में रहना यह संकेत देता है कि ट्रस्ट के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।
क्या बोले गोविंद देव गिरि?
मीडिया और जनता के सवालों के बीच, चंपत राय से मुलाकात के बाद गोविंद देव गिरि ने स्पष्टीकरण देने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मैं चंपत राय का स्वास्थ्य जानने के लिए उनसे मिलने गया था। हमारी बातचीत बहुत सकारात्मक रही। वे पूरी तरह स्वस्थ और संतुष्ट हैं। अपने इस्तीफे को लेकर उनके मन में किसी भी प्रकार का कोई आक्रोश या नाराजगी नहीं है। वे उस नई व्यवस्था के भी पूर्णतः समर्थन में हैं जिसे हम मंदिर संचालन के लिए बना रहे हैं।”
हालांकि, गिरि के इन दावों के बावजूद सार्वजनिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि यह महज एक शिष्टाचार मुलाकात थी या मंदिर के वित्तीय संकट से निपटने के लिए रची गई कोई नई रणनीति। इस घटनाक्रम ने राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक कामकाज की पारदर्शिता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग अब तेज होती जा रही है।










