Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने तूल पकड़ लिया है। एसआईटी (विशेष जांच दल) द्वारा गृह विभाग को सौंपी गई 20 पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रिपोर्ट में न केवल चोरी की पुष्टि की गई है, बल्कि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है।
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14 लोगों पर एफआईआर की सिफारिश, चंपत राय भी घेरे में
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, जांच का दायरा काफी व्यापक हो गया है। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और रामशंकर यादव ‘टिन्नू’ सहित कुल 14 प्रमुख लोगों को गबन और अनियमितताओं का आरोपी बनाया गया है। एसआईटी की जांच में पाया गया कि ट्रस्ट के पास मौजूद अभिलेख और मंदिर के सेवादारों व बैंक कर्मचारियों द्वारा दिए गए बयानों में भारी विरोधाभास है। एसआईटी ने इन सभी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। अब तक की कार्रवाई में पांच आरोपियों की निशानदेही पर दो करोड़ रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं।
प्रबंधन में भारी खामियां और सिस्टम पर सवाल
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मंदिर की निगरानी व्यवस्था और दान-प्रबंधन में भारी चूक हुई है। दानपात्रों की चाबियां अनधिकृत व्यक्तियों (जैसे रामशंकर यादव टिन्नू) के पास होना इसका सबसे बड़ा सबूत है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि मंदिर कर्मियों को गबन की जानकारी पहले से थी, लेकिन मिलीभगत के कारण इसे दबाए रखा गया। इसके अलावा, बिना किसी सुरक्षा जांच के मंदिर कर्मचारियों की आवाजाही ने सुरक्षा चक्र को पूरी तरह से विफल साबित कर दिया है।
ट्रस्ट के पुनर्गठन और ऑडिट की मांग
इस बड़े घोटाले को देखते हुए एसआईटी ने मंदिर के प्रबंधन को पूरी तरह से पेशेवर (प्रोफेशनल) बनाने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों में शामिल हैं:
ट्रस्ट का पुनर्गठन: राज्य सरकार के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजकर ट्रस्ट के सदस्यों को बदलने की प्रक्रिया शुरू करना।
पेशेवर सीईओ की नियुक्ति: मंदिर के दैनिक कामकाज और वित्तीय पारदर्शिता के लिए किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के रूप में तैनात करना।
सघन ऑडिट: पिछले पांच वर्षों के दौरान मंदिर में आए समस्त चढ़ावे और दान का फॉरेंसिक ऑडिट कराना।
तकनीकी सुधार: सीसीटीवी कैमरों की स्टोरेज क्षमता को 45 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करना और दान राशि की गणना का साप्ताहिक ऑडिट सुनिश्चित करना।
इस रिपोर्ट ने मंदिर की प्रतिष्ठा और दान दाताओं के विश्वास पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब केंद्र सरकार का अगला कदम यह तय करेगा कि ट्रस्ट की छवि कैसे सुधारी जाए और दोषियों को क्या सजा दी जाए। फिलहाल, आरोपितों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने का कड़ा निर्देश दिया गया है। राम मंदिर जैसा संवेदनशील और आस्था का केंद्र अब प्रशासनिक सुधारों के बड़े दौर से गुजरने वाला है।
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