Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए दान की चोरी और हेरफेर के मामले ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। शुरुआती दौर में 8 मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी और करीब 80 लाख रुपये की बरामदगी के बाद, अब मंदिर की कैश काउंटिंग टीम में शामिल 30 और कर्मचारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।
FIFA World Cup Prize Money: तीसरे स्थान की जंग आज, हारने वाली टीम भी बनेगी करोड़ों की मालिक
सिफारिशी भर्तियों का काला चिट्ठा
जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि कैश काउंटिंग के काम में लगे लगभग 50 कर्मचारियों में से 40 को मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों या उनके करीबियों की सिफारिश पर ‘एड-हॉक’ (अस्थायी) आधार पर रखा गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन नियुक्तियों में पारदर्शिता का घोर अभाव था। SIT अब इन 30 संदिग्ध कर्मचारियों के बैकग्राउंड, उनके पिछले रिकॉर्ड और नौकरी लगने के बाद से उनकी संपत्ति में हुई अचानक बढ़ोतरी की गहराई से जांच कर रही है। यह संदेह है कि क्या ये नियुक्तियाँ केवल दान में सेंधमारी करने के उद्देश्य से ही की गई थीं।
सीसीटीवी ने खोला चोरी का राज
इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब मंदिर प्रशासन को दान पेटी से पैसे गायब होने की लगातार शिकायतें मिलने लगीं। आंतरिक जांच के बाद मामला SIT को सौंपा गया। जब SIT ने दान केंद्र के सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से खंगाला, तो नोटों की चोरी का रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर सामने आया। फुटेज में स्पष्ट देखा जा सकता है कि नोट गिनने के दौरान आरोपी बड़े शातिराना अंदाज में नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जूतों और जेबों में छिपा रहे थे। यह साबित करता है कि चोरी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह की करतूत थी।
ड्राइवर से लेकर शिक्षक तक
गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों की पृष्ठभूमि हैरान करने वाली है। इसमें मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर रामाशंकर यादव उर्फ तिन्नू यादव मुख्य आरोपी है। रामाशंकर पर आरोप है कि काउंटिंग रूम की चाबियां उसके पास होने का उसने पूरा फायदा उठाया और पैसे की हेरफेर में अहम भूमिका निभाई। पकड़े गए अन्य आरोपियों में एक प्राइमरी स्कूल का शिक्षक अविनाश शुक्ला, पूर्व कार मैकेनिक लवकुश मिश्रा और एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव भी शामिल हैं। सुभाष चंद्र पर नोटों की गिनती की निगरानी की जिम्मेदारी थी, लेकिन वह खुद ही इस चोरी का हिस्सा बन गया।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल SIT मामले की जड़ तक पहुँचने के लिए ट्रस्ट के उन पदाधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है जिनकी सिफारिश पर इन संदिग्ध कर्मचारियों को नौकरी दी गई थी। राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर हुई इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। SIT का मुख्य लक्ष्य न केवल दोषियों को सजा दिलाना है, बल्कि भविष्य में दान-पात्र और काउंटिंग रूम की सुरक्षा व्यवस्था को इतना चाक-चौबंद करना है कि श्रद्धालु के पैसे पर कोई दोबारा डाका न डाल सके। ट्रस्ट और प्रशासन इस मामले पर पूरी तरह से मौन है, लेकिन जनता की मांग है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो।










