Ayodhya Ram Mandir Scam : अयोध्या राम मंदिर भूमि घोटाले में नया मोड़, संजय सिंह ने SIT को सौंपे सबूत

अयोध्या राम मंदिर भूमि घोटाले को लेकर राजनीति और जांच दोनों तेज हो गई हैं। संजय सिंह द्वारा SIT को सौंपे गए नए दस्तावेजों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इन सबूतों से मामले की दिशा बदल जाएगी? जानिए पूरे घटनाक्रम, आरोपों और जांच के अगले कदमों की कहानी।

Ayodhya Ram Mandir Scam

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 25, 2026

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Ayodhya Ram Mandir Scam :  अयोध्या राम मंदिर से संबंधित कथित भूमि घोटाले और चढ़ावे में चोरी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के समक्ष आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह गुरुवार को पेश हुए। लखनऊ में SIT अध्यक्ष विजय विश्वास पंत के कार्यालय में करीब 12 मिनट तक चली मुलाकात के दौरान संजय सिंह ने दावा किया कि उन्होंने जमीन घोटाले से जुड़े 11 पुख्ता सबूत और दस्तावेज जांच टीम को सौंप दिए हैं। बाहर आकर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने तीखे सवाल उठाए कि घोटाले के साक्ष्य और पैसे की बरामदगी के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई और कोई ठोस एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे इस मामले में ओरिजिनल दस्तावेज लेकर आए हैं और दोषियों के बचने का कोई रास्ता नहीं है।

चंपत राय के इस्तीफे की खबर को ट्रस्ट ने किया खारिज

एक ओर जहां भूमि घोटाले के आरोपों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की खबरें तेजी से वायरल होने लगीं। हालांकि, इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव ने स्पष्ट किया है कि चंपत राय ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने इन खबरों को सोशल मीडिया पर फैलाई गई झूठी और भ्रामक अफवाह बताया है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग लाल बागड़ा ने भी इन दावों को गलत करार दिया है। मंदिर प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और SIT की आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करें, जिसके बाद पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।

संजय सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप और सबूतों का ब्योरा

संजय सिंह ने SIT को सौंपे गए अपने 11 बिंदुओं वाले सबूतों में ट्रस्ट द्वारा जमीन खरीद में की गई कथित धांधली को उजागर किया है। उनके दावों के अनुसार, ट्रस्ट ने 4.97 करोड़ रुपये की जमीन 8 करोड़ में खरीदी, जिसमें भाजपा के तत्कालीन मेयर ऋषि कुमार उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा गवाह थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2021 में सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी द्वारा खरीदी गई जमीन को मात्र 5 मिनट बाद ही 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेच दिया गया, जिसमें भी वही गवाह मौजूद थे। संजय सिंह ने कई अन्य जमीनों की खरीद का भी जिक्र किया, जिनमें 41.60 लाख की जमीन को 2 करोड़ में, 92.50 लाख की जमीन को 5.60 करोड़ में और 2.92 करोड़ की जमीन को 24 करोड़ रुपये में खरीदे जाने का दावा किया गया है।

नजूल भूमि का मुद्दा और ट्रस्ट की भूमिका

संजय सिंह ने विशेष रूप से 2 अप्रैल 2024 की खरीद का हवाला देते हुए कहा कि अयोध्या के एसडीएम ने स्वयं लिखकर दिया है कि यह जमीन ‘नजूल’ की है, फिर भी इसे करोड़ों रुपये में कैसे खरीदा गया? उन्होंने इसे सीधे तौर पर राम मंदिर के चंदे के पैसों में डकैती और भ्रष्टाचार करार दिया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि ट्रस्ट के नाम पर भारी अनियमितताएं की गई हैं। अब मामला SIT की जांच के दायरे में है, और संजय सिंह का कहना है कि उन्होंने सारे सबूत दे दिए हैं, जिससे अब जांच प्रक्रिया में तेजी आनी चाहिए। इस प्रकरण ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका जवाब SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

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